Friday, 26 February 2021

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दास्तान एक कारगिल यौद्घा की


प्राणों की परवाह किये बगैर कारगिल पर फहराया तिरंगा

 

जयपुर(शरद टाक) विश्व के इतिहास में भारत और पाकिस्तान के बीच 12 जून 1999 को हुए कारगिल युद्घ जिसे भारत ने जीता था व स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा। इस कारगिल युद्घ की सत्य दास्तां युद्घ में अपनी प्राणों की परवाह की किये बिना पांच गोलियां खाकर कारगिल पर Mahaveer Chakra Awardee Digander Sing - Warrior of Kargil Fight between India and Pakistanतिरंगा फहराने वाले योद्घा महावीर चक्र प्राप्त दिगन्दर सिंह ने जब पत्रकारों को सुनाई तो पत्रकारों व आस-पास के लोगों के रोंगटे खडे हो गये। ये राजस्थान का सौभाग्य है कि इस वीर धरा ने इस योद्घा को जन्म दिया जिसने कारगिल युद्घ जीतने में अहम भूमिका निभाते हुए पाकिस्तानी फौज को युद्घ के मैदान में धराशाही कर कारगिल पर भारत का झंडा फहरा दिया। महावीर चक्र प्राप्त दिगन्दर रविवार को मेडता सिटी में किसान छात्रावास में आयोजित वीर तेजा  सेवा संघ मेडता द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में भाग लेने आये थे। सम्मान समारोह के बाद पत्रकारों से हुई मुलाकात में उन्होंने एक के बाद एक कारगिल युद्घ से जुडी घटनाओं को उजागर करते हुए योद्घाओं द्वारा बहाये खून के सौर्य को इस तरह खोल के रख दिया मानों कि दिगन्दर आज ही अपने साथी सैनिकों के सहयोग से कारगिल युद्घ विजय करके लौटा हो। दिगन्दर के शरीर पर युद्घ में लगी गोलियों के निशान उसकी वीरता के निशां है। इस युद्घ में राजराईफल की कमाण्डों टीम  ने सौर्य का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के 11 बंकरों को ध्वस्त कर 23 सैनिकों को मार गिराया। इस विशेष कारगिल ऑपरेशन में ऑपरेशन नायक दिगन्दर ने अपने नौ साथियों को गंवाना पडा एक मात्र दिगन्दर ही ऐसे योद्घा रहे जो इस युद्घ में जीवित रहे तथा पाकिस्तानी मेजर अनवर खान जिसने भारत की फौज को ललकारा था उसका सर सिलिंग से सर कलम कर दिया। अपनी राईफिल में तिरंगा डालकर तोलोलिंग की उंची चोटी पर फहरा दिया। महावीर चक्र प्राप्त दिगन्दर ने बताया कि उसे फौज में भरती होने की प्रेरणा उसके पिता श्योदानसिंह से मिली थी। वे स्वयं एक फौजी थे जिन्होंने 1947 की लडाई लडी थी और हमेशा उन्होंने मुझे व अन्य लोगों को सिखाया कि इन्सान को कायरता से नहीं जीना चाहिये। जब उनसे ये पूछा गया कि कारगिल युद्घ के लिये आप के कमाण्डों टीम का चयन ही क्यों किया गया तो उन्होंने बताया कि कारगिल युद्घ में अनेक भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बावजुद भी सफलताएं नहीं मिल रही थी Mahaveer Chakra holder Commando Digander Kumar encouraging students to devote them for the country कारण कि कारगिल  की ऊंचाई 18॰॰ फिट थी जिस पर पाकिस्तानी फौज ने मोर्चा संभालते हुए अपने बंकर बना रखे थे जिसके कारण भारतीय फौज कारगिल की चोटियों पर चढ नहीं पा रही थी इस स्थिति में सेना के वरिष्ठ सेना अधिकारियों की एवं युद्घ विशेषज्ञों की बैठक हुई जिसमें हमारी टिम द्वारा कारगिल युद्घ के लिये बनाई गई रणनीति पसंद आने पर तत्कालीन सेना के जनरल वेदप्रकाश मलिक व कर्नल एम.बी. रविन्द्र ने आर्शिवाद देते हुए यह युद्घ जीतने की प्रेरणा देते हुए युद्घ करने का आदेश दिया और हमने भारतवासियों के आर्शिवाद से इस युद्घ में फतेह प्राप्त की। दिगेन्द्र एक मात्र ऐसे योद्घा है जिन्हें जीवित अवस्था महावीर चक्र मिला। इस पत्रकार वार्ता में मेडता के उपपुलिस अधीक्षक रामकुंवार कस्वा एवं पूर्व अवकाश प्राप्त आईपीएस अधिकारी डॉ.अशोक चौधरी मौजूद थे।