Sunday, 26 March 2017

रिहाइशी क्षेत्रों मे शराब के ठेके: लाचारी या हठधर्मिता


आनन्द आचार्य, सम्पादक खबरएक्सप्रेस.काॅम
जनता के वोट से जनता के हित मे कुर्सी पर बैठने वाला आम आदमी से जब राजनेता बनता है तो उसको केवल अपना राजधर्म दिखता है, उसको निभाने के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता है, और वो हद अपने शासन के आर्थिक पक्ष को मजबूती देने के के लिए अपनी प्रजा को मौत के मुहानें तक ले जाने मे भी नही हिचकिचाता है।  और इसका विराट उदाहरण 75 प्रतिशत तक चेतावनी प्रदर्शित वाले तम्बाकु उत्पादों  की बिक्रि हो या और अब इसका ताजा उदाहरण वर्तमान सरकार की आबकारि नीति है जो वर्तमान सरकार की इसी आर्थिक मजबुरी को हठधर्मिता के रूप मे प्रदर्शित कर रही है, और ऐसा लग रहा कि उस राजधर्म निभाने की हठधर्मिता या मजबूरी को भी शौक  के  रूप मे बदल दिया  है।
हर गली मौहल्ले मे जबर्दस्त विरोध  के बाद भी सरकार  इस निर्णय पर त्वरित गति निर्णय से नही ले रही है, स्थानीय विरोध करने पर जिला प्रशासन का अधिकारी कुछ समय और दिन के लिए ठेके को बन्द करने का अस्थाई आदेश जारी कर देता है, वास्तविकता तो यह होती है कि उसकी अस्थाई बन्द आदेश के बावजूद शराब ठेकेदार बार बार शटर उपर- नीचे करते हुए बिक्रि चालु रखता है, जिसका उदाहरण आप मुरलीधर नगर स्थित शराब ठेके  पर देख सकते है।  प्रशासनिक अधिकारि भी जानता है कि आम आदमी हो हल्ला कितनी देर और कितने दिन करेगा, दो चार दिनों मे शांति हो जाऐगी फिर आराम से जिन्दगी भर उसी क्षेत्र मे धड्ड़ले से शराब बेचों।  उसकी इस स्थिति का फायदा शराब ठेकेदार इन रिहाइशि क्षेत्रों मे शराब बेच कर उठा रहे है। यह स्थिति बच्चों, महिलाओं और युवा वर्ग को भ्रमित व शराब सेवन के लिए प्रोत्साहन करने का काम कर रही है।
सरकार को चाहिए की वो अपनी आर्थिक मजबुरियों की दुहाई न देते हुए जनहित मे त्वरित गति से इस पर निर्णय करे जिससे समय रहते हजारो लाखों लोगों को शराब के उपयोग से होने दुष्परिणाम और उन पर निर्भर जिन्दगीयों को बचाया जा सके।