Saturday, 29 April 2017

सपना पूरा! भ्रष्टाचार हुआ खत्म!


Anand Acharya - Editor of KhabarExpress.comवरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के विरूद्ध का बिगुल क्या बजाया, सभी लोग अपना अपना समर्थन दे रहे है। ऐसा लग रहा है ऊपर से लेकर नीचे तक सबने ठान ली है कि अब भ्रष्टाचार मुक्त होना ही है। सरकार भी हिल गई है, हजारे साहब की बाते मानने की ओर है लगता है जैसे बस आजकल मे ही भ्रष्टाचार एकदम से समाप्त हो जायेगा। सोच कर ही मन मे सुकुन आ रहा है कि अब सब को ताजी हवा मे साँस लेने का मौका मिलेगा। अब किसी को भी नेताओं, अफसरों और सरकारी बाबुओं, पुलिस के सामने लाग-लपेट, चाटुकारिता, चमचागिरि, रिश्वत देने की कोई जरूरत नही रहेगी। हर गरीब को समय पर अब अपना पूरा हक मिलेगा, समय पर सस्ता न्याय मिलेगा, पुलिस का संरक्षण मिलेगा, सस्ती शिक्षा व चिकित्सा सुविधाऐं मिलेगी, घर बैठे सभी को समय पर सरकारी योजनाओं की सूचनाओं का लाभ मिलेगा।

लेकिन ये क्या, जैसे ही ऑख खुली और सपना टूटा! इतने अच्छे सपने की इतनी छोटी उम्र। पर चलो अच्छा सपना आया है, तो पूरा भी होगा, लेकिन कैसे! यहाँ तो सबकी वहीं चाल, वही ढाल! बस दिखावा हर तरफ। जैसे कि छोटे छोटे स्थानीय क्लबों से जुडे युवा इस कार्यक्रम को भी क्रिकेट वर्ल्ड कप समझ रहा है, अपनी मस्ती और मीडिया मे अपना चेहरा आने के लिए फोटो खींचवा रहा है, छोटे छोटे स्तर पर लेकिन बहुत बडे वर्ग के सरकारी अमले के बाबुओं के कर्मचारी संगठन नित प्रतिदिन मीडिया मे अपना नाम व फोटो आने के लिए अपने समर्थन का ऐलान प्रेस विज्ञप्तियाँ मे भेज रहे है, मीडियाँ संस्थाओं द्वारा संचालित गोष्ठियों मे शिरकत कर रहे हैं।  मिलावट और टैक्स चोरी करने वाला व्यापारी वर्ग भी समर्थन की विज्ञप्तियाँ देने मे पीछे नही है। छोटे मोटे नेता भी अपनी पसंदीदा भीड के सामने भ्रष्टाचार मिटाने के प्रति आतुर दिख रहा है। रिश्वतखोरी के कीर्तिमान गढने वाले विभागों के अफसर सामाजिक मेल मिलापों, मीडिया गोष्ठियों मे अपने विभाग का  स्पष्टीकरण देता नजर आ रहा है। 

ऐसा लग रहा है सब खेल मीडिया और समाज के सामने आने के लिए हो रहा है, किसी को वास्तविकता से कोई लेना देना ही नही है। क्योंकि वास्तविकता होती तो शायद इन क्लबों का स्वरूप केवल ग्रुप मे खडे होकर हाथों मे तख्तियाँ लेकर फोटो खींचवाने और उनको मीडिया कार्यालयों तक भेजने तक ही संचालित नही होता, वरन् भ्रष्टाचार का विरोध प्रदर्शन करने वाली ये युवा ताकत किसी एक भी सरकारी कार्यालय, अस्पताल, पुलिस थाने के आगे अपनी मदद भरे प्रस्तावों और उस पर क्रिर्यान्विति की सूचना लगाते, हर क्लब दिन मे मात्र एक घन्टा देकर भी कोई विभाग और आम आदमी के बीच सामंजस्य बिठा सकता है और अपनी मदद दे सकता है जो कि जीवन पर्यन्त भ्रष्टाचार मुक्त राष्ट्र की मिसाल पेश कर सकती है। लेकिन नही, ऐसा नही हो सकता अपना युवा वर्ग तो जानबुझकर ऐसा नही करता है क्योंकि ऐसा गया तो उसको हेकडी दिखाने का मौका कब मिलेगा, वो भी सेवा-चिन्ता मुक्त जिन्दगी के साथ।

मीडिया कार्यालयों को अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरूद्ध आन्दोलन के समर्थन मे अपनी विज्ञप्तियाँ भेजने वाले ये सरकारी कर्मचारी संगठन के ये सदस्य लगभग दिन भर सीट से गायब रहने के साथ अपने टीए-डीए, सैलेरी और छुट्यिाॅ मैनेज करने मे लगे रहते है।  थोडे से समय मे दिन भर किये हुए काम की औपचारिकता को फाइलों मे दिखाने, कार्यालय मे आये हुए समस्याग्रस्त लोगों की जेबों मे सेंध मारने, और जेब ढिली नही करने वालों की जुतियाँ घिसवा देने, खून के ऑंसू रूलवा देने वाला ये वर्ग गरीबों की हया की परवा किये बगैर अपने बेटे - बेटियों के लिए बंगलों, एयरकंडीशनर, कारों और कुकर्मो के खतरों से सुरक्षा व्यवस्था मे लगा रहता है। तो फिर आप ही बताओं कैसे हो भ्रष्टाचार मुक्त आदर्श भारत का सपना। भ्रष्टाचार के विरूद्ध अपने समर्थन की विज्ञप्तियाँ भेजने वालों के कर्मचारियों के मन मे जरा भी सच्चाई होती तो हर सरकारी विभाग हर सरकारी विभाग ऐसे दिखता जैसे कि किसी प्राइवेट कम्पनी या बैंक मे आये नये ग्राहक के स्वागत मे मुस्कुराकर गर्मजोशी से उसके कार्य को समझने और यथासम्भव कार्य शीघ्र पूरा होने की खुशी साझा करना। लेकिन नही रे! ये तो सपना है।   

मै कई बार पढता ह, और आमजनों से सुनता ह कि भारत का व्यापारी वर्ग सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार फैलाना वाला वर्ग है, निश्चित रूप ये भ्रष्टतम वर्ग होगा क्योंकि पैसे कैसे कमायें,  चाहे उल्टा रास्ता हो या सीधा, प्राथमिक रूप से व्यापारी वर्ग की ही सोच रहती आयी है, और इसीलिये वो खाद्य वस्तुओं मे जानलेवा मिलावट, टैक्स चोरी जैसे भ्रष्टाचारी कृत्य मे कोई परहेज नही करता है, लेकिन इससे कई गुना दोषी आजकल वे लोग जो इस वर्ग को ऐसा करने की रिश्वत भरी छूट देते है, अन्यथा सरकार के 36 तरह के महकमे से नीचे से होकर निकलने वाले इस वर्ग मे इतनी ताकत नही होती है कि इतने बडे लाइसेन्स राज मे वो अपनी सीमायें लांघते हुए ये कृत्य अन्जाम दे और राष्ट की नीवों पर भ्रष्टाचार रूपी कुदाली से हमला करें।

कैसे पूरा होगा भ्रष्टाचार मुक्त आदर्श भारत राष्ट्र का निर्माण जब नीतिनिर्धारक राजनेता सरकारी ठेको मे, सरकारी नौकरीयों मे अपने भाई-भतीजों, चमचों को सेट करने मे लगे रहते हैं। मजबूर और कमजोर इच्छाशक्ति के ये नेता, कैसे होने देंगें देश का ये सपना पूरा। कैसे पूरा होगा ये सपना जब वोट के वक्त आम आदमी अपनी जाति के ही नेता को वोट देगा चाहे वो अशिक्षित या अपराधी हो। कैसे होगा सपना पूरा जब सरकारी डॉक्टर फीस और कमीशनखोरी की दवाईयाँ लिखत रहेगा और सरकारी शिक्षक टयूशन फीस लेकर बच्चों को पढाई करायेगा। कैसे होगा पूरा ये सपना जब आम आदमी बिना बिल लिये खरीदारी करता रहेगा, अपराधियों के भय से चुप बैठा रहेगा, रिश्वतखोरी के खिलाफ नही बोलेगा।

लेकिन फिर भी उम्मीद बाकि है कि अन्ना हजारें साहब का ये बिगुल और हजारों-लाखों का समर्थन जरूर कुछ करेगा, आप और हम भी इसमे जरूर इसमे शामिल होंगें, इसके प्रति लिखने और हर सम्भव क्रियान्विति मे भी सक्रिय रहेंगें।