Tuesday, 26 January 2021

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फिर बेअसर हुआ साम्प्रदायिक सौहार्द्र पर आतंकवाद का प्रहार


तनवीर जाफरी, (सदस्य, हरियाणा साहित्य अकादमी)

गत् दो दशकों से आतंकवाद की मार झेल रहा भारतवर्ष पिछले दिनों एक बार फिर उस समय बमों के धमाकों से दहल उठा जबकि भारत के दो प्रसिद्घ आर्थिक केंद्र बैंगलोर तथा अहमदाबाद को आतंकवादियों द्वारा अपने निशाने पर ले लिया गया। बैंगलोर भारत के कर्नाटक राज्य का वह प्रसिद्घ नगर है जिसे प्रदेश की राजधानी होने के साथ-साथ विश्व के अग्रणी साईंस सिटी के रूप में जाना जाता है। आतंकवादी दो वर्ष पूर्व भी इस प्रतिष्ठित नगर को अपना निशाना बना चुके थे। गत् सप्ताह बैंगलोर में हुए बम धमाकों के ठीक अगले ही दिन गुजरात राज्य की राजधानी तथा प्रसिद्घ औद्योगिक नगर अहमदाबाद को अतंकियों ने अपना निशाना बना डाला। अहमदाबाद में तो आतंकवादियों द्वारा जिस दुस्साहसिक कार्यवाही का परिचय दिया गया उसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। मानवता के इन दुश्मनों ने अहमदाबाद में 16 स्थानों पर क्रमवार विस्फोट किए। जिसमें 5॰ से अधिक बेगुनाह लोगों की मौत हो गई जबकि 15॰ से अधिक लोग जख्मी हो गए। आतंकवादियों ने अहमदाबाद में किए गए विस्फोटों के दौरान क्रूरता व अमानवीयता की सभी हदों को पार कर दिया। इन राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों द्वारा अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में उस समय एक बडा विस्फोट कर दिया गया जबकि उस अस्पताल में पहले से किए गए विस्फोटों में घायल हुए लोगों को लाया जा रहा था तथा वहां आम लोगों विशेषकर सामाजिक कार्यकर्ताओं की भारी भीड इकट्ठा थी। इस अकेले हादसे में 28 लोगों के मारे जाने का समाचार है। मृतकों व घायलों में कई वे सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं जोकि घायलों की सहायता हेतु अस्पताल पहुंचे थे।

इन विस्फोटों के बाद भारत में एक बार फिर यह प्रश्ा* आम लोगों के समक्ष खडा हो गया है कि आखिर मानवता विरोधी यह आतंकवादी बेगुनाहों की जान लेकर क्या संदेश देना चाहते हैं। और उनकी मंशा आखिर क्या है? आखिर यह सिलसिला और कब तक चलता रहेगा? गत् 5 वर्षों में आतंकियों द्वारा भारत के प्रमुख मंदिर, मस्जिद व दरगाहों तथा कब्रिस्तान में बम धमाके कर देश की साम्प्रदायिक एकता को आहत करने का घिनौना काम कई बार किया जा चुका है। धार्मिक त्यौहारों के अवसरों को भी इन मानवता विरोधियों ने नहीं बख्शा। ऐसे अवसरों पर भारतवासियों द्वारा दिखाई गई साम्प्रदायिक एकजुटता से घबरा चुके यह आतंकवादी अब देश के आर्थिक केंद्र समझे जाने वाले प्रमुख नगरों को अपने निशाने पर ले रहे हैं। मुम्बई, हैदराबाद, जयपुर, बैंगलोर तथा अहमदाबाद में हुए बम धमाकों को इसी दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। सूरत, गुजरात राज्य का वह प्रसिद्घ औद्योगिक नगर है जिसका कि पूरे विश्व में हीरा उद्योग व वस्त्र उत्पादन के क्षेत्र में काफी बडा नाम है। अहमदाबाद धमाकों के पश्चात सूरत को भी दहलाने की कोशिश की गई। परन्तु आतंकवादी अपने इन नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो सके। आतंकवादियों को सूरत में मिली असफलता का मुख्य कारण था सूरत की जनता में आतंकवाद के विरुद्घ आई जागरुकता एवं एकजुटता।

गत् दो दशकों में आतंकवादियों द्वारा भारत में जिस प्रकार के हादसों को अंजाम दिया जा रहा है तथा जिन लक्ष्यों को साधकर वे आतंकवादी घटनाएं अन्जाम दे रहे हैं, उन्हें देखकर अब यह बात साफ हो चुकी है कि इनका मकसद भारत में तनाव फैलाना, अस्थिरता लाना तथा देश को आर्थिक क्षति पहुंचाना है। निश्चित रूप से ऐसी दिल दहला देने वाली घटनाओं के बाद भारतीय नागरिक विचलित हो उठते हैं परन्तु क्रूरता के इन ठेकेदारों के नापाक इरादों को समझते ही समस्त भारतीय नागरिक अपनी पूरी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए आतंकवादियों के नापाक इरादों को नाकाम कर देते हैं। प्रश्ा* यह  है कि क्या आतंकवादियों की क्रूरता का यह सिलसिला भविष्य में भी यूं ही चलता रहेगा? क्या इनके द्वारा आए दिन किए जाने वाले बम धमाकों की चपेट में आकर बेगुनाह लोग, बुजुर्ग व मासूम बच्चे इसी प्रकार अपनी जानें गंवाते रहेंगे? आखिर कब थमेगा बेगुनाह लोगों की जान लेने का यह दर्दनाक सिलसिला? इस विषय पर भी बहुत गंभीर चिंतन किए जाने की सख्त जरूरत है।

इसके लिए सर्वप्रथम तो देश में राजनैतिक दलों को एक सुर, एकमत तथा एकजुट होने की गहन आवश्यकता है। आरोप-प्रत्यारोप तथा राजनैतिक खींचातानी से राजनैतिक दलों को भले ही कोई लाभ पहुंचे या न पहुंचे परन्तु आतंकवादी इस राजनैतिक उठापटक का लाभ अवश्य उठाते हैं। गत् दिनों बैंगलोर व अहमदाबाद में हुए धमाकों के बाद भारतीय जनता पार्टी की एक जिम्मेदार समझी जाने वाली नेता सुषमा स्वराज द्वारा एक अत्यन्त गैर जिम्मेदाराना बयान देते हुए इन आतंकवादी हमलों के लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया गया। अपने आरोप के समर्थन में सुषमा स्वराज द्वारा यह तथ्य दिया गया कि परमाणु समझौते को लेकर भारतीय मुसलमानों में कांग्रेस के प्रति जो नाराजगी पैदा हुई है, उसे दूर करने के लिए कांग्रेस द्वारा भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में धमाके कराने की साजिश की गई है। इस अत्यन्त बचकाना, गैर जिम्मेदाराना एवं अपरिपक्व वक्तव्य से सुषमा स्वराज ने अपनी राजनैतिक सोच का परिचय दे दिया है। ऐसे ही वक्तव्य आतंकवादियों के हौसले बढाते हैं। सभी राजनैतिक दलों के नेताओं को आतंकवादी हमलों के समय इस प्रकार की बयानबाजी से स्वयं को दूर रखना चाहिए। हालांकि भाजपा ने सुषमा स्वराज के बयान से यह कहकर अपना पल्ला झाड लिया है कि यह उनकी व्यक्तिगत् राय है, पार्टी की नहीं। परन्तु मेरे विचार से किसी भी जिम्मेदार नेता को ऐसे अति संवेदनशील विषयों पर व्यक्तिगत् तौर पर भी अपने ऐसे दुर्भावनापूर्ण विचार नहीं व्यक्त करने चाहिए।

इस समय ऐेसे उपाय किए जाने की जरूरत है जिससे आतंकवादी हमलों को रोका जा सके तथा इनके नापाक इरादों व मंसूबों को नाकाम किया जा सके। इस सिलसिले में गुजरात सरकार द्वारा आतंकवादी नेटवर्क का पता बताने वाले व्यक्ति को 51 लाख रुपए की धनराशि देने की जो घोषणा की गई है, वह अत्यन्त सकारात्मक व सराहनीय उपाय है। ऐसी घोषणा न सिर्फ सभी राज्य सरकारों के द्वारा की जानी चाहिए बल्कि केंद्र सरकार को भी ऐसी ही एक स्थाई पुरस्कार योजना बनानी चाहिए जोकि आतंकवादी नेटवर्क का सुराग देने वालों हेतु कायम की गई हो। इस योजना में सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखने का समुचित प्रबंध होना चाहिए। इसके अतिरिक्त पूरे देश को सूरत के नागरिकों से सबक लेते हुए पूरी जागरुकता दिखानी चाहिए। जिला स्तर पर पूरे देश में नागरिकों को सचेत, जागरुक व चौकस रहने हेतु बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। सभी समुदाय के लोगों की मिली-जुली सुरक्षा समितियां, वार्ड, मोहल्ला, स्ट्रीट तथा कस्बा स्तर पर सक्रिय होनी चाहिए जोकि आतंकवादी घटनाओं से आम लोगों की जानमाल की रक्षा करने के उपायों के संबंध में समाज को प्रशिक्षित कर सकें। इसमें जिेला प्रशासन, राज्य सरकारों तथा केंद्र सरकार को अपना भरपूर सहयोग देना चाहिए।

इस आम धारणा से हर व्यक्ति भली-भांति परिचित है कि आतंकवादियों का कोई दीन धर्म नहीं है। इन्सानियत के यह दुश्मन चन्द पैसों की खातिर अपना जमीर बेच देते हैं तथा बेगुनाह आम लोगों के हंसते-खेलते घरों को उजाड देते हैं। अतः इन्हें संरक्षण देना भी उतना ही बडा अपराध है जितना कि किसी आतंकवादी घटना को अंजाम देना। अतः प्रत्येक भारतवासी को संदिग्ध व्यक्तियों पर पूरी नजर रखनी चाहिए। जाति धर्म या भाषा आदि के धोखे में आकर किसी संदिग्ध एवं अपरिचित व्यक्ति पर विश्वास करते हुए उसे किसी प्रकार का संरक्षण हरगिज नहीं देना चहिए। बजाए इसके ऐसे व्यक्ति की जानकारी तत्काल सम्बद्घ पुलिस तंत्र को दी जानी चाहिए। हमें याद रखना होगा कि आतंकवादियों के हौसले दिन-प्रतिदिन बढते ही जा रहे हैं तथा यह आए दिन खतरनाक से खतरनाक घटनाओं को अंजाम देते जा रहे हैं। इनके नापाक इरादों से हमें यदि कोई शक्ति बचा सकती है तो वह है भारतवासियों की राजनैतिक, साम्प्रदायिक व सामाजिक एकजुटता तथा पूरे देश की चौकसी व जागरुकता।


 तनवीर जाफरी - [email protected]