Tuesday, 30 May 2017

ऋषि आचार्य: जन्मदिन विशेष


सनातन मान्यता के अनुसार आज ऋषि पंचमी के दिन ऋषि आचार्य का जन्मदिन है।  उनके इस जन्मदिवस पर खबरएक्सप्रेस डाॅट काम के निर्माण और संचालन मे तकनीकी पक्ष के जिम्मेवार ऋषि आचार्य के तकनीकी जीवन पर कुछ शब्द आपसे साझा कर रहा हुं नई पीढ़ी इस लेखन से कुछ नवीन कार्यो के प्रति ऊर्जा दिखाऐगी:-


1992 का वह वर्ष जब कम्प्यूटरजी का हमारे घर आगमन हुआ था तो पढ़ाई मे निम्न स्तर होने का दंश झेल रहे मेरे भाईसाहब को जैसे ईश्वर ने उपहार स्वरूप जादू की छड़ी भेज दी हो, उनके अन्दर छुपी कल्पनाओं को साकार करने का मौका मिल गया हो, कप्यूटर लाॅजिक्स की जटिल गुत्थीयों की सिलसिलेवार पेशगी से तैयार होने वाले बेहतरीन कम्प्युटर एप्लीकेशन(साॅफ्टवेयर) तैयार करना  एक शगल हो गया था।
बारहवीं मे विज्ञान विषय के साथ न्याय न कर पाने की सजा मे उनको  परीक्षा परिणामों मे सफलता नही मिली, लेकिन लगता था कि उनको इस बात को कोई गम नही है, होता भी क्यों, भगवान ने उनकी मंजिल ही दूसरी ही बना रखी थी।
उन वर्षो मे जब पापाजी कम्प्युटर पर अकाउंट्स का कार्य करते रहते थे तो वे एक किनारे, एक ट्क उनको देखते रहते, पापाजी को लगा कि शायद इसकी रूचि इसमे है तो उन्होने कम्प्युटर के अपने दो दिनों के गुरू श्री अश्विनी तोमर के यहां भेज दिया।
बस फिर क्या था, पंख निकलने की तैयारी हो गई, एक-एक घंटे की मात्र दो महीनों की उस ज्ञानशाला ने उन पंखों को पूरा कर दिया और इतनी उर्जा भर दी की पंछी अपनी कल्पनाशीलता की उड़ान उड़ सके।   
दिन भर मे पापाजी घर से बाहर रहते है और इधर भाईसाहब खाना पीना छोड़ छाड़ के एक ही धुन मे सवार कम्प्युटर पर चिपके रहते, और नये नये कोडींग के नये एक्सपेरिमेंट करके खुश होते रहते, मुझ जैसे मूढ़ आदमी पर अपनी दिन भर की प्रोग्रामिंग उपलब्धियों की धौंस जमाते रहते, और मै मन ही मन गुस्सा कि अगर ये नही होते तो मै यह गेम खेल लेता या वो नया गेम आया है तो ये खेल लेता।
सायंकालीन अवसर पर जब पापाजी अपने काम करने बैठते तो भाई की टकटकी शुरू, कम्प्युटर एक ही  था(साहब मंहगा आता था, एक लाना भी उपलब्धि था आप यूं समझो 20 एमबी की हार्डडिस्क  चालीस हजार की थी)  और वो बाप के आगे बेबस से घंटो बैठे रहते कि बस बीच कहीं दस मिनट भी मिल जाये तो दिमाग मे ये आइडिया आया है इसको करके देखूं, इस दौरान खाली पड़े हाथों के बावजूद खाने पीने की कोई इच्छा नही, भला हो भगवान का जो इस अवसर पर मां जैसी पालनहार देता है, मम्मी ने जोर जबदस्ती से खिला दिया तो खा लिया नही तो ‘नई कोडिंग’ को ही ईश्वर का प्रसाद मान लिया। अगला दिन भी ऐसा ही और ऐसा करते करते लगभग साल पूरा होने का आया, पापाजी भी इनकी इस लगन और परिणामों से कुछ आशान्वित होने लगे, बाजार मे भी कुछ व्यापारि बंधुओं ने अपने व्यवसाय के लिए कम्प्युटर प्रयोग लेने शुरू कर दिये थे तो उन्होने उनके व्यापार से सम्बन्धित कुछ एप्लीकेशन बनानी शुरू कर दी, दो साल मे विशेष प्रसिद्धी मिलनी शुरू हुई तो ईश्वर ने दूसरा कम्प्युटर और बख्श दिया, फिर तो क्या था 1995 से 1999 के बीच लगभग दस विभिन्न व्यवसायों की अकाउंटिग एप्लीकेशन तैयार। 
 
Computer Programmer Rishi Acharya
1999 मे जब वीएसएनएल ने एसटीडी रेट पर इन्टरनेट सेवाऐं शुरू की तो इस महंगे प्रयोग मे भी अग्रणी रहते हुए हमारे पहले इन्टरनेट प्रोजेक्ट को भी आॅनलाइन किया।  उनकी कला कौशल का परिणाम ये था की जहां लोग एक वेब पेज के लिए पूरा दिन खपा देते थे वहीं इन्होने इस एचटीएमल की कोडिंग और पेज संरचना के लिए डाॅस माध्यम से ही एक साॅफ्टवेयर (इसको आप जुगाड़ भी समझ सकते है)बना दिया जिससे हम देश भर के व्यवसाइयों की ताजा सूची त्वरित गति से इन्टरनेट पर डाल पाते थे। इस दौरान 2000 मे हैण्डीक्राफ्ट की वेबसाइट तथा 2002 राजबी2बी.काम एक बना दी। इन्टरनेट पर डाटाबेस का प्रयोग 2004-05 मे इस्तेमाल होना शुरू हुआ था, इससे पूर्व विश्व की बड़ी कम्पनीयों की विशेषज्ञ टीम ही इन्टरनेट पर डाटाबेस के कार्य किया करती थी और आम वेब डेवलपर एचटीएमएल से ही काम निकालता था। 
2004 मे जब हमे बीकानेर आठवी बोर्ड और बीकानेर विश्वविद्यालय का परीक्षा परिणाम हमारे पोर्टल्स पर दिये तो भी यही विधि होती।  इस बीच सन् 2004 मे हिन्दी से अंग्रेजी और अंग्रेजी से हिन्दी डिक्शनरी साॅफ्टवेयर का निर्माण और सन् 2005 मे एएसपी लैंग्वेज के सहारे उन्नत स्तर की  डाटाबेस युक्त पूर्ण डाटाबेस वेबसाइट का निर्माण उनके तकनीकी कला कौशल से पूर्ण होने लगा।    2005 मे यूनिकआईडिया.नेट और फिर सन् 2006 मे खबरएक्सप्रेस.काॅम का निर्माण भी इनकी योग्यता का ही परिणाम है। और 2009 आते आते शब्दकोष का आॅनलाइन संस्करण भी पेश कर दिया। 2013 मे जहां एंड्राॅईड पर इस न्यूज पोर्टल की ऐप लांच कर दी वहीं 
2009 के आखिर मे रेस्टोरेंट की दुनिया के लिए एक बेहतरीन अप्लीकेशन भी तैयार कर दी जो आज दुनिया भर के सैकड़ो होटल और रेस्टोरंेंट पर सफलतम् रूप से संचालित हो रही है। 
भाई साहब आज भी अपनी लगन के बुते कमाई हुई इस विशिष्ट योग्यता के साथ नये नये प्रयोग करते रहते है इन प्रयोगों मे जहां तीस से अधिक प्रकार के उद्योगों के लिए साॅफ्टवेयर निर्माण शामिल है, वहीं पांच बड़े पोर्टल का निर्माण और समय समय पर तकनीकी उन्नत करना भी शामिल है।
बड़ी और मझौली कम्पनीयों के लिए यह यात्रा छोटी हो सकती है लेकिन बीकानेर जैसे छोटे शहर जहां पर तकनीकी ज्ञानवर्धन के साथ साथ व्यापार की भी अपेक्षाकृत कमजोर मांग के बावजूद अपने आप को एक क्षेत्र मे टिके रहना गौरव की अनुभूति कराता है।
उनकी इस यात्रा मे जहां हमारे पिताजी श्री सत्यनारायण आचार्य  की दूरदृष्टि, साधन सुविधाऐं, पग पग पर मार्गदर्शन देना बहुत बड़ा योगदान साबित करती है वहीं इनकी अथक मेहनत, लगन और उससे भी बढ़कर इस विषय के प्रति उनका असीम प्यार महत्वपूर्ण साबित होता है।