Wednesday, 02 December 2020

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हिंदी साहित्य का अखाड़ा - भाग 1


DISCLAIMER: इस कहानी में उपयुक्त हुए नाम, संस्थाए, जगह, घटनाएं इत्यादि का उपयोग सिर्फ और सिर्फ कहानी को मनोरंजक बनाने के लिए किया गया है। किसी भी व्यक्ति या संस्था से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है, कृपया इस कथा को मुक्त हास्य में ले; पर/और दिल पर न ले !!! कथा में निहित व्यंग्य को समझिये ! धन्यवाद ! 

::: भाग एक::: 


बहुत समय पहले की बात है। मुझे एक पागल कुत्ते ने काटा और मैंने हिंदी साहित्यकार बनने का फैसला कर लिया। ये दूसरी बार था कि मुझे किसी पागल कुत्ते ने काटा था और मैं अपनी ज़िन्दगी से जुड़ा हुआ कोई महत्वपूर्ण फैसला कर रहा था। पहली बार जब एक महादुष्ट पागल कुत्ते ने काटा था तो मैंने शादी करने का फैसला किया था, उस फैसले पर आज भी अफ़सोस है; खैर वो कहानी फिर कभी !
तो हुआ यूँ कि उस कुत्ते ने मुझे काटा और जब मुझे हॉस्पिटल में इंजेक्शन लगाए जा रहे थे तो मैंने सोचा कि इस घटना पर कुछ लिखना चाहिए [ दरअसल मुझे दर्द बहुत हो रहा था,इसलिए नर्स को देखने की भी इच्छा नहीं हो रही थी और मेरे मन में उस कुत्ते को ढूंढकर उसे पत्थरों से मारने की बड़ी इच्छा हो रही थी ]; तो गुस्से में मैंने एक फैसला लिया कि मैं इस घटना पर एक कविता जरुर लिखूंगा।
तो यारो मुझे इंजेक्शन लग गए, दर्द थोडा कम हुआ, नर्स थोड़ी खुबसूरत लगी और डॉक्टर का बिल थोडा ज्यादा लगा। बहुत गुस्से में मैं बाहर निकला, सड़क के किनारे से कुछ पत्थर अपनी जेब में डाले और उस कुत्ते की खोज में निकल पड़ा। सोच लिया आज या तो वो कुत्ता नहीं या मैं नहीं !
बहुत देर तक उसे खोजा, वो कहीं नहीं मिला। गुस्से में बडबडाते हुए मैं अपने घर पहुंचा। बीबी ने पुछा, “क्या हुआ, कहाँ थे, फिर दोस्तों के साथ मटरगश्ती कर रहे थे क्या?” बस फिर क्या था। मेरा गुस्सा फूट पड़ा, मैंने कहा, “बेकार की बाते मत करो, मुझे कुत्ते ने काट दिया था, इंजेक्शन लेकर आ रहा हूँ। हमेशा मेरे पीछे मत पड़ा करो।”
बीबी ने मेरी बात काटकर कहा, “लो और सुन लो, कौन कह रहा है ये बात। अरे भूल गए, तुम मेरे पीछे घूमते थे, शादी कर लो। शादी कर लो। नहीं तो मैं मर जाऊँगा। कुछ याद आया? कभी भी ये बात नहीं भूलना कि तुम मेरे पीछे पड़े थे, मैं नहीं ! समझे ! आईंदा ऐसी बात दोबारा की तो मुझसे बुरा कोई न होंगा, समझे ?”
मैंने बैल की तरह समझ गए वाले अंदाज में अपना सर हिलाया।
वो गुर्रा कर बोली, “मेरी बला से और दो –तीन कुत्ते तुम्हे काट ले!”
मैं चुप ही रहा, गलत जगह गुस्सा दिखाने का नतीजा सामने था। हालांकि मैं बोलना चाह रहा था कि, “अरे जिस दिन से तुमसे शादी की है, मेरा जीना हराम हो गया है, मैं जीते जी मर गया हूँ। तुम रोज अपनी कडवी जुबान से जितनी और जो जो बाते मुझसे कहती हो, वो कुते के काटे जाने से ज्यादा ही होते है। तुमसे बुरा कोई और क्या होंगा” ऐसे ही कई बाते मैं कहना चाहता था, पर you know, I am a gentleman सो ऐसी बाते नहीं कहूँगा [ आप लोग समझदार हो, पानी में रहकर मगरमच्छ से आज तक किसी ने बैर किया है, जो मैं करूँगा ! ही ही ही ( typical खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे अवतार ) और क्या मैं पागल हूँ, जो ऐसी भयानक गलती करूँगा ] 
तो थोड़ी देर तक घर में अखाडे का माहौल रहा। नतीजा ये हुआ कि बीबी ने आज ऑफिस के लिए लंच का डब्बा नहीं दिया ! 
मैं अपने दफ्तर के लिए निकल पड़ा। रास्ते में मेरे दोस्त बाबू से मुलाकात हुई, हमने अपनी-अपनी स्कूटर सड़क के किनारे लगाई और फिर अपनी मनपसंद चाय के ठेले से दो कट चाय लेकर पीने लगे, इधर उधर की बातो के बाद, जब मैंने पैसे देने के लिए जेब में हाथ डाला तो वो पत्थर हाथ में आये, मुझे फिर गुस्सा आ गया। मैंने वो सारे पत्थर निकाल कर फेंक दिए, बाबू ने ये देखा तो हँसते हुए कहने लगा, “अबे मुरारी, पागल हो गया है क्या, जो पत्थर जेब मे लेकर घूम रहा है। या फिर भाभी से मार पड़ी है ! हा हा हा !”
मेरा दिमाग तो गरम था ही, मैंने उसका कालर पकड़ कर उसे एक झापड़ मारा, उसने ने भी काफी दिनों से शायद किसी को पीटा नहीं था, सो, उसने भी मुझे एक घूँसा मारा। बस फिर क्या था। चाय के ठेले के पास अखाडा बन गया, हम दोनों ने एक दुसरे को खूब मारा। आस पास के लोगो ने पहले तो तमाशा देखा, फिर हमें बचाने के लिए आये। हम दोनों ने गुस्से से एक दुसरे को देखते हुआ कहा, “साले आज तो बच गया, बाद में देखूंगा “और अपनी अपनी स्कूटर उठायी और ऑफिस की ओर चल दिए, दोनों एक ही जगह पर काम करते थे। 
थोड़ी दूर जाने के बाद ऑफिस के पहले एक तालाब आता था, मैं उसके पास रुक गया। स्कूटर पार्क किया और पानी के पास जाकर बैठ गया। थोड़ी देर में बाबू भी मेरे पास आकर बैठ गया। उसने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया, मैंने देखा, कुछ मूंगफली थी, मैंने चुपचाप ले लिए, आखिरकार वो १५ साल पुराना दोस्त था। उसने मुझे सॉरी कहा और मैंने उसे। 
फिर मैंने उसे कुत्ते के काटने की कहानी बतायी, वो जोर जोर से हंसने लगा, “साले ! तुझे काटने के कारण वो कुत्ता जरुर पागल हो गया होंगा“ मैंने गुस्से में उसे देखा और उसे एक घूँसा मारा। उसने मुझे एक घूँसा मारा, हम फिर लड़ने के लिए तैयार हो गए। फिर हम रुक गए और जोर जोर से हंसने लगे। 
मैंने कहा, “यार बाबू, दिल बहुत दुखी है, सोचता हूँ अपने दुःख पर एक कविता लिखूं।”
उसने कहा, “अबे तो लिखना, कौन रोक रहा है। जिसे रोकना है वो घर में बैठी है, हा हा हा“
हम दोनों ने फिर ठहाका लगाया। 
मैंने कहा, “सुन अर्ज किया है”
उसने कहा, “हां बोल”
मैंने कहा, “अर्ज किया है”
उसने कहा “अबे अब आगे तो बोल सही। ऑफिस भी तो जाना है “
मैंने कहा, “हां यार; ये तो अच्छी लाइन हो गयी। सुन“
“पागल कुत्ते ने मुझे काटा है 
मुझे उससे बदला लेना है 
पर क्या करे यारो, 
मुझे ऑफिस भी तो जाना है !”

बाबू ये सुनकर जोर जोर से हंसने लगा और कहा, “हाँ यार ये सही है। इसे पूरी लिख ले और कहीं पर छपने को भेज दे।”
मैंने सहमती में सर हिलाया और उससे कहा, “आज से मेरे भीतर में एक साहित्यकार ने जन्म लिया है”
उसने मुझे दो मूंगफली और दी और कहा, “और साले तुझे अपने साहित्य के लिए ये मूंगफली का इनाम मिल गया,ये समझ ले।” हम दोनों हँसते हुए ऑफिस चले।
ऑफिस में सब मेरी अस्त-व्यस्त हालत देखकर खूब हंस रहे थे। 
बॉस ने मुझे देखा और सहानुभूति के स्वर में कहा, “देखो यार घर में चाहे जितना भी झगडा हो, ऑफिस में उसका प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।”
मुझे बहुत गुस्सा आया, पर मेरे लिए मेरी बीबी और मेरे बॉस, दोनों ही बहुत अहम थे। मैं खून के घूँट पीकर रह गया। 
लंच के वक़्त बाबू आया। मुझे भूखा बैठा देखकर वो मुझे कैंटीन लेकर गया और वहां पर रोटी सब्जी खिलाया। खाने के बाद उसने मुझे पुछा, “अबे कुछ और लिखा है, या वही पर रुक गया है।” 
मैंने उसे देखकर मुस्कराते हुए कहा, “लिखा है न यार, सुन, अर्ज किया है,” उसने मुझे रोका और अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए कहा, “साले एक बार और अर्ज बोलेंगा तो मैं तुझे पीट दूंगा। यहीं पर। सच में।“
मैं खिसिया गया, मैंने कहा, “अच्छा सुन !”