Tuesday, 01 December 2020

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किसानों, वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों ने सांझा किए अनुभव

खेती में आमूलचूल परिवर्तन लाने के निश्चय के साथ कार्य किया तथा अपनी अलग पहचान बनाई

किसानों, वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों ने सांझा किए अनुभव

बीकानेर, 13 दिसम्बर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में गुरुवार को किसान, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी एक मंच पर बैठे और अपने-अपने अनुभव सांझा किए।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वित्तीय सहयोग से राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत कृषि महाविद्यालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय जैविक प्रमुख रतनलाल डागा थे। उन्होंने कहा कि जब किसान-वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी एक मंच पर बैठेंगे तो कृषि की दिशा बदल जाएगी। विद्यार्थियों को किसानों एवं वैज्ञानिकों के अनुभवों से सीखने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के साथ किसानों के खेतों में भी प्रयोग करने चाहिए। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया तथा कहा कि ऐसे प्रयास हों कि जैविक उत्पाद घर-घर पहुंचे। 

वरिष्ठ कृषि पत्रकार महेन्द्र मधुप ने कहा कि किसान सही मायनों में ‘खेतों के वैज्ञानिक’ हैं। अनेक किसानों ने उत्पादन एवं आय वृद्धि में कीर्तिमान स्थापित किए हैं तथा दूसरों के लिए मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों से किसानों के संघर्ष एवं अनुंसधान की जानकारी विद्यार्थियों को मिलेगी। उन्होंने ‘मिशन वैज्ञानिक किसान’ की जानकारी दी।

कुलपति प्रो. बी. आर. छीपा ने कहा कि सम्मेलन में शिरकत करने वाले समस्त प्रयोगधर्मी किसान, मिट्टी से जुड़े हुए हैं। इन्होंने खेती में आमूलचूल परिवर्तन लाने के निश्चय के साथ कार्य किया तथा अपनी अलग पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय द्वारा पहली बार तीनों श्रेणियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

अधिष्ठाता एवं परियोजना प्रमुख आई.पी. सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत भविष्य में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. नरेन्द्र पारीक ने किया। उन्होंने आगंतुकों का आभार जताया। इस अवसर पर प्रसार शिक्षा निदेशक डाॅ. एस. के. शर्मा, डाॅ. इंद्रमोहन वर्मा सहित अन्य कृषि वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी मौजूद थे। 

इन किसानों ने निभाई भागीदारी

कार्यक्रम में 21 नए कृषि उपकरण इजाद करने वाले श्रीगंगानगर के गुरमेल सिंह घौंसी, गैसीफायर के पारम्परिक डिजायन में बदलाव करने वाले हनुमानगढ़ के रायसिह दहिया, आबू सौंफ विकसित करने वाले सिरोही के इशाक अली, मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण करने वाले सीकर के मोटाराम शर्मा, खरपतवार हटाने, खड़े प्याज के पत्ते काटने तथा प्याज खुदाई यंत्र विकसित करने वाले सीकर के श्रवण कुमार बाजिया, गाजर की दुर्गा-4 किस्म विकसित करने वाले जोधपुर के मदन लाल देवड़ा, फूलगोभी की अजीतगढ़ सलेक्शन विकसित करने वाले सीकर के जगदीश पारीक ने भागीदारी निभाई।

इसी प्रकार मिर्ची ग्रेडिंग, गाजर धुलाई, लोरिंग मशीन इजाद करने वाले जोधपुर के अरविंद साखला, देशी बैंगन एवं बेल वाली सब्जियों में नवाचार करने वाले जयपुर के गंगाराम, जैविक खेती में नवाचार करने वाले जयपुर के गजांनद अग्रवाल, जैविक विधि से अनार की खेती करने वाले सीकर के रामकरण एवं संतोष, जैविक खेती में नवाचार करने वाले जोाधुपर के पवन के टाक एवं राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सदस्य राकेश चैधरी ने अपने-अपने अनुभव सांझा किए। 

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