Saturday, 24 June 2017

आरम्भ हुआ नाटक महाकुंभ] तीन नाटकों का हुआ मंचन

दिन भर चला रंगकर्म पर मंथन, तीन नाटकों का हुआ मंचन

आरम्भ हुआ नाटक महाकुंभ] तीन नाटकों का हुआ मंचन

बीकानेर। बीकानेर थिएटर फेस्टिवल का शुभारंभ देशभर से आये रंग दिग्गजों की उपस्थिति में स्थानीय हंसा गेस्ट हाउस में हुआ। त्रिदिवसीय नाटय समारोह का उद्घाटन जूनून थियेटर ग्रुप की संस्थापिका मती संजना कपूरए एनण्एसण्डीण्के पूर्व निदेशक देवेन्द्र राज अंकुरए सुप्रसिद्ध रंगनेत्री मती प्रीता माथुरए कुलपतिए राजूवास प्रोण् एण्केण्गहलोतएए केन्द्रीय साहित्य पुरस्कार से सम्मानित रंगकर्मी और साहित्यकार मधु आचार्य आशावादी और भवानीशंकर व्यास विनोद ने किया। 

इस अवसर पर आयोजक मण्डल के  हंसराज डागा ने कहा कि बीकानेर अपने आथित्य सत्कार के लिये विश्वविख्यात हैए बीकानेर की धरा पर इस आयोजन से वरिष्ठ रंगकमियों से युवाओ को थिएटर को और ज्यादा जानने का अवसर मिलेगा। संजना कपूर ने कहा कि थिएटर करना जूनूनी काम है। कला के सभी रूपों में नाटक की अपनी गंभीरता है और नाटक को आम आदमी से जोडने में छोटे शहरो के जुनूनी थिएटर का अपना योगदान है। मधु आचार्य आशावादी ने बीकानेर के गौरवाशाली रंगकर्म के विभिन्न पडावो के बारे में बताया और कहा कि बीकानेर में जिस तरह बिना किसी सुविधा के भी गंभीर और रचनात्मक थिएटर हो रहा है वो सराहनीय है। बीकानेर के रंगकर्म ने पूरे देश में अपनी साख बनाई है और यहां के सक्रिय और सार्थक रंगकर्म की वजह से ही इसे उतर भारत की नाट्य राजधानी कहा जाता है। वरिष्ठ रंगकर्मी देवेन्द्र राज अंकुर ने कहा कि बीकानेर रंगकर्म से उनका पुराना नाता है। बीकानेर में एनएसडी की और से लगी वर्कशाॅप के साथ साथ समय समय पर बीकानेर के नाट्य प्रदर्शन को देखने भी बीकानेर आए है। संजना कपूर ने कहा कि बीकानेर रंगकर्म उन्हे हमेशा सकारात्मक उर्जा देती है। इसी सकारात्मक उर्जा के कारण बीकानेर आना पसंद करते है। कला के प्रति बीकानेर का समर्पण और अनुशासन से पूरे देश को सीख लेनी चाहिए। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन दयानंद शर्मा ने किया। अतिथियो को स्मृति चिन्ह राकेश चावलाए प्रदीप भटनागरए एस डी चैहानए अरूण गुप्ताए मुरारी शर्मा ने प्रदान किए। 


सार्थक नाट्य आलोचना का होना बेहद जरूरी. देवेन्द्र राज अंकुर 
बीकानेर थिएटर फेस्टिवल में उद्घाटन के बाद नाट्य आलोचना. विचार से प्रदर्शन तक विषय पर आयोजित हुई नाट्य परिचर्चा में बोलते हुए देवेन्द्र राज अंकुर ने कहा कि नाटक के प्रदर्शन से अवचेतन के भीतर विचार उत्पन्न होना चाहिए। इसी विचार की उधेडबुन से ही हम किसी कथ्य को समझने और जानने की और बढते है। नाट्य आलोचना को लेकर भी कई भेद है।  नाटक के निर्दशकए लेखक और अभिनेता को ये भ्रम होता है कि नाटक को ठीक से दर्शक समझता नही है जबकि हकीकत ये है कि हम वैसी ही नाटक देखना चाहते है जो कि हम देखना पसंद करते है। सार्थक नाट्य आलोचना से ही नाटक की समझ विकसित होती है। एक साधारण कहावत ये भी होती है कि एक असफल कवि आलोचक बन जाता है परंतु ये भी उस रूप में हो सकता है जब उसे उस विधा के सभी तकनीकी और सैद्वांतिक पहलूओ की जानकारी हो। मुम्बई से आये रंगकर्मी राजेन्द्र तिवाडी ने कहा कि रंगमंच की मर्यादा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है नाट्य आलोचना में अभिनेताए लेखक के साथ साथ निदेशक की भी ये जिम्मेदारी होती है कि नाटक के दर्शक में सम्प्रेषण का ध्यान रखे। वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाडी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में्र कहा कि किसी भी कृति को कला की कसौटी पर आंका जाना चाहिए। समालोचना और समीक्षा में अतिरिक्त संवेदनशीलता की जरूरत होती है। विषय का ज्ञान और संवेदनशीलता नही होने से कई बार समीक्षा या आलोचना गंभीर नही हो पाती।  नाट्य परिचर्चा में नगर के वरिष्ठ कलाधर्मी लक्ष्मीनारायण रंगाए मधु आचार्य आशावादीए सुरेश हिन्दुस्तानीए एस डी चैहानए प्रदीप भटनागरए गगन मिश्राए नवनीत पांडेए संजय पुरोहितए असित अमित गोस्वामीए कमल रंगाए योगेन्द्र पुरोहितए दयानंद शर्माए सारिका शर्माए राजेन्द्र जोशीए प्रमोद शर्मा आदि ने चर्चा की। नाट्य परिचर्चा में बीकानेर पुलिस अधीक्षक डा0 अमनजीत सिंह कपूर ने भी रंगमंच से जुडे अपने संस्मरण सुनाये। 

पहले दिन हुआ तीन नाटको का अलग अलग प्रेक्षागृहो में मंचन 

समारोह के पहले दिन तीन नाटको की प्रस्तुति तीन अलग अलग मंच पर हुई। दिन की पहली प्रस्तुति स्व0 दिनेश ठाकुर की संस्था अंक द्वारा अशोक मिश्रा के निर्दशन में नाटक अटके भटके लटके सुर के साथ हुई।  टाउन हाॅल में मंचित हुए इस नाटक में प्रीता माथुर और अमन गुप्ता ने अभिनय किया। खचाखच भरे टाउन हाॅल मे बीकानेर के रंगधर्मीयो ने इस नाटक का आनंद लिया। इस नाटक का देश के सभी बडे समारोह में मंचन हो चुका है। शाम 6 बजे वेटरनरी प्रेक्षागृह में चण्डीगढ की सुखबिर के निर्देशन में नाटक रोमियो जूलिएट एण्ड सेवन क्लोन्स का मंचन हुआ। नाटक में अभिमन्युए डा0 पी चन्द्रशेखरए रिंकु जैनए जसविन्द्रए सिंहए जसवीर कुमारए विनोद कुमारए चेनिस गिलए प्रगतिए शीलाए जजवीर सिंहए गरमीत कौरए ने अभिनय किया। क्लोंन्स थिएटर के रूप में बीकानेर में इस तरह की शायद ये पहली प्रस्तुति थी। रंग बिरंगे कपडो और चेहरो में क्लोन्स में कलाकारो ने वेशभूषा के साथ अपनी प्रस्तुति से दिल जीता। दिन की अंतिम प्रस्तुति के रूप में हंसा गेस्ट हाउस में रात 8ण्30 बजे बीकानेर के सुधेश व्यास के निर्देशन में नाटक दुलारी बाई का मंचन किया जायेगा। नाटक में भगवती स्वामीए सुनील जोशीए नवलकिशोर व्यासए अशोक व्यासए के के रंगाए विकास शर्माए सुमित मोहितए शिव सुथारए अमित सोनी आदि ने अभिनय किया। नाटक में संगीत राजेन्द्र झुंझ का था और मंच प्रबंध बल्लभ पुरोहित का था। मणि मधुकर के लिखे इस लोक नाटक में राजस्थान और बीकानेर की लोक छटाएसस्कृृति को गीत संगीत और हास्य के माध्यम से दिखाया गया। नाटक में ये बताया गया कि दुनिया में लालच का कोई अंत नही है परंतु इंसानी प्रेम और रिश्तो के आगे सब बेकार है। 
     

फोटोग्राफ के माध्यम से जानी बीकानेर की संस्कृति और वैभव 
बीकानेर थिएटर फेस्टिवल के दौरान नगर के वैभवए कलाए और संस्कृति से देश के रंगकर्मियोए कलाकारो और कला अनुरागीयो से परिचय करवाने के लिये एक फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई  जिसमें नगर के प्रेस फोटोग्राफर अजीज भुट्टोए मनीष पारीकए दिनेश कुमार ओझा ;डीकेद्ध और नौशाद कादरी के नगर की विरासतए संस्कृति  और बीकानेर रंगमंच को दिखाते फोटो प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी का अवलोकर बाहर से आये सभी अतिथियो ने किया। 

कल होंगे तीन नाटक मंचित 
कल समारोह के दूसरे दिन भी तीन नाटक मंचित किए जायेंगे। दिन की पहली प्रस्तुति दोपहर तीन बजे हंसा गेस्ट हाउस में गोवा के वरिष्ठ निर्देशक विजय नाईक द्वारा नाटक ताबूत जिंदगी का के रूम में होगी जिसमें आत्माराम धारगलकरए संपदा खेडेकरए योगेन्द्रए हालाका देसाईए संकेत लवंदेए गौतम नाईकए अमर प्रसादीए समीर शिरोडकर आदि अभिनय करेंगे। दिन की दूसरी प्रस्तुति बीकानेर क सुधेश व्यास के निर्देशन में प्रसिद्व नाटक चार कोट के रूप में होगी जिसने देश भर में अपने कंटेट के कारण छाप छोडी है। दिन की अंतिम प्रस्तुति मुम्बई के लोकनाट्य तमाशा के मंचन के साथ होगी। वेटरनरी प्रेक्षागृह में होने वाली इस प्रस्तुति का निर्देशन मुम्बई विश्वविधालय के एकेडमी आॅफ थिएटर आटर््स के निदेशक डा0 मेंगेश बनसोड कर रहे है। सभी नाटको में दर्शको का प्रवेश निशुल्क होगा। 
    कल बीकानेर की वरिष्ठ रंगनेत्री मंदाकिनी जोशी को उनके उत्कृष्ट अभिनय के लिये बीकानेर थिएटर अवार्ड अर्पित किया जायेगा। अभिनेत्री संजना कपूर और देवेन्द्र राज अंकुर उन्हे ये अवार्ड अर्पित करेंगे। इस अवसर पर उनके नाटको में अभिनय की एक छोटी फिल्म भी दिखाई जायेगी। 
    कल सुबह
9ण्30 बजे रंगकर्मी और रंगकर्म विषय पर नाट्य परिचर्चा आयोजित की जायेगी जिसमें रवि शुक्ल विषय को 15 मिनिट की नाट्य प्रस्तुति के रूप में प्रस्तुत करेंगे जिसमें शांतनु सुरोलिया अभिनय करेंगे। परिचर्चा की अध्यक्षता मधु आचार्य आशावादी करेंगे और मुख्य अतिथि जी एस चैनी तथा विशिष्ट अतिथि मंगेश बनसोड होंगे।  इस सत्र का संचालन सुरेश हिन्दुस्तानी करेंगे। 

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