Monday, 18 December 2017

कलाधर्मियों ने मनाई रविन्द्र नाथ टैगोर की जयन्ति

अधुरे बने रविन्द्र रंगमंच परिसर में हुआ आयोजन

सिमेन्ट के टूटे टूकड़ो के सहारें टिकाये पुराने लकड़ी के त ते पर बैठे गायक ने जब रविन्द्र संगीत की स्वरलहरियां बिखेरी तो अधुरे बने रविन्द्र रंगमंच परिसर में जगह-जगह बिखरी निर्माण सामग्री और लकड़ी की बल्लियों के सहारे टिका रविन्द्र रंगमंच जहां आयोजन में शमिल नगर के रंगकर्मियों व साहित्यकारों के दुख को बढ़ा रहा था वहीं अभावों के बीच हो रहें रविन्द्र संगीत के इस आयोजन में उपस्थित सृजनधर्मियों ने 30 वर्षों से पूर्ण निर्माण को तरस रहें रविन्द्र रंगमंच के अधुरेपन पर अफसोस जताया।

बीकानेर। चोखेर आलोय देखे छिलाम, चोखेर बाहिरे तथा आमि तोरेई जानि, तोरेई जानि आमाय जे जोन आपोन जाने तोरेई ज्ञान और ममो चित्ते निति नित्ते के जे नाचे, ताता थोई-थोई, ताता थोई-थोई, ताता थोई-थोई की रविन्द्र संगीत की स्वरलहरियां जब अधुरे बने और बनने से पहले खंडहर बन चुके रविन्द्र रंगमंच के परिसर में गुंजी तो परिसर में बिखरी निर्माण सामग्री और बल्लियों के सहारे टिका रंगमंच जहां आयोजन में उपस्थित नगर के रंगकर्मियों और साहित्यकारों की पीड़ा को बढ़ा रहा था।
विश्वकवि रविन्द्र नाथ टैगोर की जयंति पर रंगमंच अभियान समिति की ओर से अधुरे बने रविन्द्र रंगमंच परिसर पर रविन्द्र संगीत का आयोजन किया गया। रविन्द्र संगीत के यातनाम गायक सपन कुमार ने कविगुरू रविन्द्र की रचनाओं को बांग्ला भाषा में प्रस्तुत कर मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन में तबले पर संगत हितेन्द्र पारीक ने की। इससे पूर्व आयोजन के प्रार भ में उपस्थितजनों ने कविगुरू के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीपक जलाकर अधुरे रंगमंच के पूर्ण निर्माण की कामना की। रविन्द्र संगीत के इस अवसर से लेकर वर्तमान स्थिति तक के हालात पर अफसोस जताते हुए आह्वान किया की हमसब की आशा जल्दी ही पूरी हो। इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी आनन्द वि आचार्य ने कहा कि हमें इन सब आयोजनो के साथ ही इस रंगमंच के पूर्ण निर्माण के लिए प्रशासन को जगाने के लिए भी तैयारी कर लेनी चाहिए। आयोजन का संचालन कर रहे युवा कवि संजय आचार्य वरूण ने कहा कि विश्वकवि की जयंति का यह दिन हम क्षमा उत्सव के रूप में मना रहे है यह इसलिए की जिन विश्वकवि के नाम से इस रविन्द्र रंगमंच का निर्माण 30 वर्षों पूर्व प्रार भ हुआ वह आज भी अधुरा है। रविन्द्र संगीत के इस आयोन के समापन पर रंगमंच अभियान समिति के प्रभारी वरिष्ठ रंगकर्मी रामसहाय हर्ष ने कहा कि कविगुरू के जन्मदिवस पर उनके नाम से बनना प्रार भ हुआ यह रंगमंच तीन दशको और तमाम संघर्षों के बाद भी अधुरा ही रहता हम सृजनधर्मियों के लिए विड ंबना कीबात है।
दीपकों, टार्च और मोबाइल टार्च की रोशनी में हुए रविन्द्र संगीत के आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार पर्यावरण विद शुभु पटवा, विजय शर्मा, हरीश बी शर्मा, रमेश शर्मा, राजेश ओझा, दिलिप सिंह भाटी, अजित राज, इरशाद अजीज, रोहित बोड़ा, जयदीप उपाध्याय, मुकेश भोजक, नवल व्यास, विकास शर्मा, दीपक स्वमी, अशोक जोशी, रमेश भोजक समीर, मनीषा आर्य सोनी, राजाराम स्वर्णकार, बाबूलाल छंगाणी, गोविन्द नारायण, वरिष्ठ चित्रकार मुरली मनोहर माथुर, विक्रम जागरवाल, अनील ओझा, ठाकुरदास स्वामी, चन्द्रशेखर जोशी, योगेश हर्ष एवं अनेक युवा व रंगकर्मी, साहित्यकार उपस्थित थे

Bikaner Ravindra Rangmanch   Ram Sahay Harsh   Shubhu Patwa   Harish B Sharma   Rohit Boda