Monday, 18 January 2021

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शर्मा की नाट्यकृति ऐसो चतुर सुजान लोकार्पित

राजस्थानी में नाटकों की कमी अखरने वाली है

 

 

 

 

 

संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष अर्जुनदेव चारण ने कहा है कि राजस्थानी में नाटकों की कमी अखरने वाली है और इसी वजह से उन्होंने सिर्फ राजस्थानी भाषा में ही नाटक लिखने का बीड़ा उठाया है। यह खुशी की बात है कि सारे हिदुस्तान में राजस्थानी नाटकों को सराहना मिल रही है। जरूरत इस बात की है कि अधिक से अधिक राजस्थानी नाटक लिखे जाएं। कवि-पत्रकार तथा नाटककार हरीश बी. शर्मा की राजस्थानी नाट्यकृति के लोकार्पण के अवसर पर चारण ने रविवार को यह कहा। स्थानीय टाउन हॉल में आयोजित इस समारोह में उन्होंने राजस्थानी की कथाकारों से आह्वान किया कि वे नाट्य लेखन की दिशा में आगे बढ़ें जिससे न सिर्फ राजस्थानी भाषा-साहित्य का भंडार नाटकों से समृद्ध हो बल्कि जन-रंजन का एक बड़ा माध्यम भी लोगों को मिल सके। चारण ने कहा कि युवाओं में नाट्य लेखन के प्रति ललक उन्हें आश्वस्त करती है और अगर हरीश जैसे दस नाटककार भी प्रतिबद्ध होकर राजस्थानी में नाट्य-लेखन करना शुरू करें तो आने वाले समय में राजस्थानी रंगमंच को नया आयाम मिल सकता है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हनुमानगढ़ से आए साहित्यकार ओम पुरोहित ‘कागद’ ने कहा कि लोक मंच हमारी परंपराओं से जुड़ा है और इसे समाज ने पल्लवित-पोषित किया है लेकिन जैसे-जैसे साहित्य में पाश्चात्य प्रभाव बढ़ता गया नाट्य प्रस्तुतियों में काफी बदलाव आए और इस वजह से न सिर्फ लोक-रंगमंच पिछड़ गया बल्कि नए रंगमंच के लिए भी उल्लेखनीय काम नहीं हो सका। उन्होंने युगबोध के नाट्य लेखन के लिए डॉ.चारण के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इसी तरह के नाटकों की आज के वक्त में जरूरत है। हरीश के नाटक सुजान को उन्होंने सामंती परिवेश में आधुनिक युग बोध का नाटक बताते हुए कहा कि इसमें सूक्ष्म प्रतीक हैं जो आज के हालात से दर्शकों से सीधे जोड़ते हैं ओर सोचने के लिए मजबूर करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि लोकार्पित कृति नाटक लिखने की सैद्धांतिक प्रक्रिया से निकलकर यहां तक पहुंची है। कोई भी नाटक रंगमंच की निकाय से निकले बगैर वह कोरा आलेख है और हरीश ने इसे समझकर इसे रंगमंच पर ही रचा है। यही वजह है प्रकाशन से काफी पूर्व ही इसके मंचन हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि नए नाट्य-लेखकों के लिए यह कृति काफी महत्वपूर्ण है।  नाट्य लेखक हरीश बी. शर्मा ने इस मौके पर कहा कि उन्हें चुनौतियां लेना और आजमाइश में रहना अच्छा लगता है और यही वजह है कि राजस्थानी में नाटक लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि बचपन में मां से सुनी कहानियों पर यह नाटक आधारित है। इस मौके पर निर्देशक विपिन पुरोहित के निर्देशन में ‘अैसो चतुर सुजान’ नाटक का आंशिक मंचन हुआ जिसमें किसन स्वामी, करणीङ्क्षसह राठौड़, मंजू रांकावत, सुनीलम पुरोहित, उदय व्यास आदि ने भूमिकाएं की। रामसहाय हर्ष की ओर से हरीश के व्यक्तित्व-कृतित्व पर आधारित एक वृत्तचित्र भी प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन वास्तुविद् आर.के.सुतार ने किया। शायर संजय आचार्य वरुण ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कवि रमेश भोजक ‘समीन’ ने स्वागत भाषण दिया तथा आभार शायर इरशाद अजीज ने जताया।   

 

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