Saturday, 23 January 2021

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कैयोडी जचै मौकै पर पुस्तक लोकार्पित

बीकानेर, राजस्थान प्रदेश समृद्ध है, राजस्थानी भाषा समृद्ध है, राजस्थानी संस्कृति समृद्ध है, मैं राजसथानी भाषा को मान्यता प्रदान करवा कर ही दम लूंगा, यह बात बीकानेर के सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने जे. आर. एम. रामपुरिया भवन, गंगाशहर में ’’कैयोडी जचै मौकै पर‘‘ पुस्तक के लोकार्पण के अवसर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि जब उन्होंने राजस्थानी भाषा में सांसद पद की शपथ लेनी चाही तो उन्हें कई खट्टे मीठे अनुभव हुए। उन्होंने पक्ष विपक्ष के सांसदो से मिल कर कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता हेतु राजनीति से ऊपर उठ कर प्रयास करना चाहिए। सांसद ने कहा कि यह पुस्तक हर किसी के लिए उपयोगी है ओर हम जैसे राजनीतिक व्यक्तियों के लिए बहुत उपयोगी है। उन्होंने पुस्तक के लेखक जतनलाल दूगड ’सुमन‘ को इंगित करते हुए कहा कि बीकानेर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में अपनी मातृभाषा में एक नई कृति लोकार्पित करके महत्वपूर्ण काम किया है। पुस्तक का लोकार्पण वरिष्ठ राष्ट्रीय कवि एवं साहित्यकार भवानीशंकर व्यास ‘विनोद‘ ने करते हुए कहा कि यह पुस्तक साझा सम्पति है। इसमें सम्मिलित ओठे, अखाणे, मुहावरे, लोाकोक्तियां इत्यादि पीढयों से कहे व सुने जा रहे है। उन्होंने कहा कि सन् १९४९ में मुरलीधर व्यास एवं नरोतम दास ने कहावतों पर पुस्तक लिखी थी। उसमें १३५५ कहावतें थी। आज जतनलाल दूगड की इस पुस्तक में १३५० कहावतें हैं। उन्होंने कहा कि दूगड ने इन कहावतों को अकारादि क्रम में प्रस्तुत करते हुए सरल भाषा में अनुवाद किया है। इससे यह पुस्तक आम जन के लिए पठनीय बन गई है। उन्होंने अनेक कहावतों, लोकोक्तियों ओठों, अखाणों को सुनाते हुए पुस्तक की पूरी विवेचना करते हुए बताया कि पुस्तक में हर विषय जैसे कृषि, व्यापार, सौन्दर्य व जीवन के अनेक पहलूओं को छुआ है। वर्णमाला के हर व्यंजन व हर स्वर पर उक्ति, ओठे आदि प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने उपस्थित श्रोताओं से कहा कि उन्हें अपने संगृह में इस पुस्तक को रखना चाहिए। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महापौर भवानी शंकर शर्मा ने कहा कि सामाजिक संस्थाओें का कार्य हो अथवा धार्मिक, अस्पताल हो चाहे गौचर, सबमें दूगड की सकि्रय भूमिका स्पष्ट दृष्टिगोचर होती है, उसके बावजूद सृजन के लिए समय निकालना एक दुरूह कार्य है। पुस्तक की समीक्षा करते हुए साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि ‘कैयोडी जचै मौकै पर‘ पुस्तक में राजस्थानी लोक जीवन की सदियों से कण्ठहार बनी लोकोक्तियों व कहावतों को प्रभावी एवं सार्थक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि एसी पुस्तक प्रत्येक आदमी के पास रहनी चाहिए जिससे उसका मार्गदर्शन होता रहे।
इन्द्रचन्द दूगड ने कहा कि विज्ञान का विद्यार्थी रहने के बावजूद जतन ने व्यापार में पूर्ण सफलता प्राप्त करने के साथ ही  साहत्य के क्षेत्र में भी प्रतिभा को आगे बढाया है। प्रकाशक लूणकरण छाजेड ने कहा कि समाज में एसे अनेक उदीयमान साहित्यकार है साहित्य के फलक पर उभर कर आने की प्रबल सम्भावनाएं होती है।
लेखकीय अभिव्यक्ति में जतनलाल दूगड ‘सुमन‘ ने कहा कि इस कृति में मेरा नया कुछ नहीं है ‘तेरा तुझ को अर्पण‘ की तरह यह प्रस्तुति सभी बडे बुजुर्गों, संत महात्माओं व सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों से सुने संकलित वाक्यांश है। कार्यक्रम मे पधारे आगतुंकों का आभार ईश्वरचन्द दूगड ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन लूणकरण छाजेड ने किया।

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