Tuesday, 26 January 2021

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प्रेम और उल्लास से खेला डोलची खेल

बीकानेर  प्रेम और उल्लास के साथ आज हर्ष और व्यास जाति के बीच पानी का खेल खेला गया। दोनो जातियों के युवा,बुर्जग, बच्चों सभी ने एक दूसरे पर चमडे की बनी डोलची से पीठ पर पानी की मार करते है। दोनो जातियों के लोग इस खेल को बहुत अच्छे ढग से खेलते है। बताया जाता है कि आज से 365 वर्ष पहले आचार्या जाति के कार्या को सम्पन्न कराने के लेकर  हर्ष और व्यास जाति के  बीच विवाद हुआ। उसे विवाद को खत्म करने के डोलची का खेल शुरू किया गया। बताया जाता है कि उस समय पुष्करणा समाज में व्यास जाति का प्रभुत्व था। हर्ष जाति के लोग सिंध से दिल्ली में व्यापार करते थे। और वह आराम करने के लिए हर्षा के चौक में रूकते थे। पुष्करण समाज में उस समय कार्यक्रमों की अनुमति व्यास जाति के लोग से लेनी पडती थी। लेकिन कहा जाता है कि किसी कार्यक्रम को लेकर आचार्या जाति के लोगों ने व्यासों से अनुमति मांगी लेकिन व्यासों ने इसकी अनुमति नही दी । उस समय हर्ष जाति पुष्करणा समाज में शमिल नही थी। आचार्यो के कार्या को लेकर हर्षो ने बिना व्यास जाति कि अनुमति के खाना खिलाने कि बात कही । जब आचार्या का खाना बनकर तैयार था तो उसी समय व्यास जाति के लोगों ने बनाया हुआ खाना खराब कर दिया और वहाँ पर नुकसान किया इस पर हर्ष जाति के लोगों ने लापसी बनाकर समाज को भोजन करवाया । तब से इन दोनो जातियों के बीच विवाद शुरू हो गया। इनका विवाद इतना बढ गया कि होली पर कपडों पर रंग की जगह खुन से सन गए। इस विवाद को लेकर दोनो जातियां राजा के पहुंचे लेकिन फैसले से पहले ही व्यास जाति को सही ठहराया । उस समय भईयाजी माथुर ने व्यासों के पक्ष में फैसला सुनाया। उसके बाद हर्ष जाति को पुष्करणा समाज में शामिल कर लिया गया तथा व्यासों से सम्बन्ध बनाने कि बात कही गई। तब से होली पर लालाणी कीकाणी व्यास चौक से व्यास जाति के लोग हर्षो को  निमंत्रण देने के लिए आते है तथा हर्षो के चौक में पहुंचकर डोलची पानी का खेल खेनते है। फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को करीब दो घंटे चलने वाले खेल को हर्ष जाति के लोगो के कहने पर बंद कर दिया जाता है। इसके बाद गुलाल उडाया जाता है। खेल शुरू होने से पूर्व व्यास जाति के लोग लालाणी कीकाणी व्यास चौक से दौडते हुए हर्षो के चौक की तरफ आते है तथा ए हर्षो के चौक से भईयाजी माथुर की प्रोल के बीच हुडदंग के साथ पानी  डोलची का खेल जाता है।।

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