Sunday, 19 November 2017
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भारत-अमेरिकी कमाण्डों ने आतंकवादी को धर दबोचा

भारत-अमेरिका सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास

बीकानेर, पूरे विश्व पर खतरे की तरह मंडरा रहे आतंकवाद को लेकर भारत और अमेरिका किस तरह चिंतित व तैयारिया में जुटे हुए है इसका नजारा मंगलवार को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में देखने क मिला। जब दोनो देशो की सेनाओं के कमाण्डों ने एक गांव में घुसे आतंकवादियों को मार गिराने के लिए संयुक्त कार्यवाही के साथ संचार सेवाओं के आधुनिक उपकरणों की मदद आतकवादियों की टोह लेने में की। 5 अप्रेल से महाजन फील्ड फायंरिग रेंज में चल रहे भारत-अमेरिका सेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान दोनों के कमाण्डों ने संयुक्त कार्यवाही में बेहतरीन तालमेल, सटीक निशानों के जरिये चारों तरफ से धावा बोलकर आंतकवादियों को घेर लिया। दोनो तरफ से जवाबी हमलों व फायंरिग के अभ्यास में जहां कमाण्डों ने गांव के घरों में घुसकर आतंकवादियों का सफाया किया व एक मकान से आतंकवादी को जिन्दा धर दबोचा गया। युद्धाभ्यास के दौरान कमाण्डों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से और कमाण्डों आकाश से गांव में उतरे व आंतकवादियों का सफाया किया। आंतकवादी घटनाओ में त्वरित व संयुक्त कार्यवाही के उदेश्य को लेकर आयोजित इस युद्धाभ्यास में आमजन को सुरक्षित रखते हुए आतंकवादी अधिक नुकसान न पंहुचाये उनक सीमित क्षेत्र में रखकर पकडा जाये या सफाया किया जाये इसके लिए आधुनिक उपकरणों का भी बेहतर इस्तेमाल किया गया।

स्वचालित रोबोट की मदद
भारत-अमेरिका सेना के संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान आतंकवादियों की टोह लेने तथा सफाया के लिए स्वचालित रोबोट की मदद ली गई। कमाण्डों ने 200 मीटर तक स्वचालित फायर करने वाले रोबोट के साथ-साथ सेना के टेलेंट व यूएसवी की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया। मानवरहित उपकरणों की मदद से घुसपैठियों को खोज निकालने में सफलता प्राप्त की।

संयुक्त युद्धाभ्यास का क्रम
एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास 2005 से भारत और अमेरिकी सेनाओं के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास क्रम का एक हिस्सा है।  इसे भारत-अमेरिकी रक्षा संबंधों में आपसी सहमति के अंतर्गत नए ढांचे के अन्तर्गत शुरू किया गया है। यह युद्ध अभ्यास प्लाटून स्तर से शुरू होकर एक श्रेणीबद्ध रूप में कमांड पोस्ट ;सी पी एक्सद्ध तथा फील्ड ट्रेनिंग  एक्सरसाइज; एफटीएक्स  तक की जाएगी। युद्धाभ्यास का 7वां संस्करण दक्षिण पष्चिम कमान के तत्वाधान में 05 मार्च 12 से दो जगहों में शुरू किया गया है। अमेरिकी सैनिक टुकडी यू.एस. आर्मी पैसिफिक का एक हिस्सा है। सी पी एक्स में एक इंजीनियर ब्रिगेड हैडक्वार्टर है जिसमें दोनों तरफ के योजनाकार हैं। एफ टी एक्स में 25वीं इंफेन्ट्री डिवीजन हवाई की 14वीं यू एस कैवलरी की सेकेन्ड स्क्वाड्र्न के साथ स्ट्र्इकर्स की एक प्लाटून तथा समान आकर की भारतीय मैकेनाइज्ड इंफेन्ट्री सैनिक टुकडी है।  यह युद्ध अभ्यास काफी रोचक है क्योंकि इसमें दोनों देशों की सेनाओं की ओर से अनेक चौकसी उपस्कर, संचार साधन, आई ई डी खोजक तथा निष्प्रभावीकरण तकनीकियों का उपयोग किया जा रहा है।इस अभ्यास को डिजर्ट लार्क कोड नाम दिया गया।* भारत-अमेरिकी सैनिकों से रात में अपने युद्ध वाहनों की सहायता से घेराबंदी करके संदिग्ध घुसपैठियों को पकडने का अभ्यास किया। इस अभ्यास में थ्रा डाइमेन्सन का भी उपयोग किया गया। इस युद्धाभ्यास में दोनों तरफ की सैनिकों को इंजीनियर ब्रिगेडों की कार्यप्रणाली को समझने का शानदार मौका मिला।

ये रहे उपस्थित
भारत-अमेरिकी सेना के संयुक्त युद्धाभ्यास  डिजर्ट लार्क और सर्वदा सेवियर्स में भारत और अमेरिकी सेना का प्रतिनिधिमंडल उपस्थित था, जिसकी अगुवानी जीओसी-इन-सी दक्षिण पश्चिम कमान ज्ञान भूषण तथा यू एस आर्मी पैसिफिक के कमाण्डर लेपि्*टनेन्ट जनरल फ्रांसिस ’’फ्रैन्क‘‘ विरसिनिस्की द्वारा की गई। इसमें ई एस जी के सह अध्यक्ष भी उपस्थित थे।* इसके साथ-साथ भारतीय सेना के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें उपस्थित थे अमरीकी टोली का प्रतिनिधित्व कर्नल थॉमस जे रॉय, कमाण्डर द्धितीय इंजीनियर ब्रिगेड, संयुक्त राज्य सेना ने किया। दो सप्ताह लम्बे अभ्यास में एक अमरीकी सैनिक कम्पनी और इतने ही दक्षिण पश्चिम कमान के भारतीय सैनिक भाग ले रहे हैं।

तकनीक व सोच को गहनता से समझा
भारतीय सेना के दक्षिणी-पश्चिमी कमान के जीओसी ज्ञान भूषण ने बताया है कि भारत -अमेरिकी सेना के संयुक्त युद्धाभ्यास से दोनो देशो की सेना को बहुत कुछ जानने व समझने का अवसर मिल रहा है। महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में पत्रकारों से बातचीत में उन्होने बताया कि युद्धाभ्यास के दौरान दोनो देशो के सैनिको ने एक दूसरे को समझने के साथ उपकरणों को जानना, इस्तेमाल कर लाभान्वित हुए है दोनो के सैनिको एक दूसरे देश की संस्कृति को भी जाना व समझा है पिछले वर्ष अमेरिका के अलास्का मै यह युद्धाभ्यास हुआ था। अमेरिकी सेना के कमाण्डर लेपि्*टनेन्ट जनरल फ्रांसिस ’’फ्रैन्क‘‘ विरसिनिस्की ने पत्रकारों को बताया कि भारत-अमेरिकी सेना के संयुक्त युद्धाभ्यास मे दोनो देशो के सैनिकों ने एक दूसरी की तकनीक व सोच को गहनता से समझा है। यह दोनो देशो के लिए लाभदायक है आपकी सहयोग व तकनीक संचार सेवाओं के आदान-प्रदान से दोनो देशो के सैनिक ने बहुत कुछ सीखा है उन्होने बताया कि सोच के अनुरूप युद्धाभ्यास सफल साबित हो रहा है। 

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