Thursday, 26 November 2020

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नई दिल्ली में केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (कैब) की बैठक

प्रारम्भिक शिक्षा में किसी को अनुत्तीर्ण नही करने के प्रावधान को बदला जाना चाहिए

नई दिल्ली, 19 अगस्त, 2015। राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्राी प्रो. वासुदेव देवनानी के प्रारम्भिक शिक्षा में किसी भी विद्यार्थी को अनुत्तीर्ण नही करने के प्रावधान पर पुनर्विचार कर इसमें संशोधन करने का सुझाव दिया है।प्रो. देवनानी बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्राी श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (कैब) की बैठक में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए बोल रहे थे।उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा को देशानुकूल एवं युगानुकूल बनाते हुए नई शिक्षा नीति का निर्धारण करना चाहिए। विशेषकर सूचना-प्रौधोगिकी के साथ भारतीय दर्शन, संस्कृति, यौग और नैतिक शिक्षा का समावेश करने के अलावा महाराणा प्रताप जैसे शूरवीरों की गाथाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। प्रो. देवनानी ने कहा कि वर्तमान में आठवीं कक्षा तक हमारे बच्चों का कोई मूल्यांकन नही हो रहा और उन्हें एक साल बाद ही दसवीं बोर्ड की परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है। इससे एक ओर जहां  बालक के मन पर बोझ आता है वही उसके परिवार पर भी मानसिक दवाब बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि हम बालकों को तनावरहित शिक्षा देने के पक्षधर है। इसलिए बालकों की योग्यता का समय-समय पर सही मूल्यांकन होना चाहिए। पिछली बार राज्य में आठवीं के लिए ऐच्छिक बोर्ड की परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें डेढ़ लाख विद्यार्थियों ने सहभागिता की थी। इस वर्ष यह संख्या दस लाख को पार कर गई है। शिक्षा राज्यमंत्राी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक न्यूनतम अधिगम स्तर तय किया जाना चाहिए और इसे अध्यापक की उपलब्धि से जोड़ा जाए, ताकि परीक्षा प्रणाली मात्रा तोता रटंत आधारित नही होकर विद्यार्थी की समझ अर्जित ज्ञान के उपयोग आदि की जांच करने वाली हो सकें।

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