Thursday, 26 November 2020

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हेरिटेज वॉटर वॉक में जाना संसोलाव तालाब  का इतिहास

इस तालाब का प्राचीन नाम सहस्रलाब था

हेरिटेज वॉटर वॉक में जाना संसोलाव तालाब  का इतिहास

दिनांक 8 जुलाई 2018। बीकानेर की सांस्कृतिक संस्था लोकायन द्वारा रविवार 8 जुलाई को हेरिटेज वॉक की श्रंखला में 'हेरिटेज वॉटर वॉक' का आयोजन किया गया। वॉटर वॉक में बीकानेर के सबसे प्राचीन और पुरातात्विक महत्व के तालाब संसोलाव तालाब के इतिहास एवं प्राचीन समाज में उसकी उपयोगिता की जानकारी दी गयी। वॉक का नेतृत्व कर रहे तालाब अध्येता एवं ‘जल और समाज’ पुस्तक के लेखक डॉ. ब्रजरतन जोशी ने बताया कि इस तालाब का प्राचीन नाम सहस्रलाब था क्योंकि इसमें सैकड़ों छोटे छोटे नालों से से बारिश का पानी बहकर आता था। धीरे धीरे समय के साथ यह नाम अपभ्रंश होकर संसोलाव बन गया और अब यह तालाब इसी नाम से प्रचलित है। वॉक के दौरान तालाब की आगोर, इसके घाट, इसके चारों और तालाब को साफ रखने के तरीकों, आस-पास पायी जाने वाली वनस्पतियों, पेड़-पौधों तथा जीव-जन्तुओं की भी विस्तृत जानकारी वॉक में आये लोगों को प्रदान की गयी।

वॉक के संयोजक गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि वॉक में आये 50 से अधिक प्रतिभागियों ने इस तालाब के एतिहासिक महत्व को जाना और इस तालाब के बनाने वाले कारीगरों, विषेषज्ञों की अद्भूत दूरदर्षिता को जानकर अभिभूत हुए। पुराने जमाने में कैसे एक समाज बिना आधुनिक तकनीकों से पीने के पानी की इतनी बड़ी व्यवस्था को इतने सुंदर ढ़ंग से तैयार करता था और उसे इतने समय तक व्यवस्थित कर लेता था। आज इस तालाब की दुर्दशा देखकर वॉक में आये लोगों को काफी निराषा हुई। तालाब की आगोर में हो रहे कब्जों एवं तालाब के आस पास फैली गंदगी को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन और कानून की इस प्राचीन तालाब को संरक्षित करने की कोई मंषा नहीं है।

वॉक में बड़ी संख्या में कॉलेज के व्याख्याता, छात्र, इतिहासविद्, फोटोग्राफर एवं फिल्ममेकरस ने हिस्सा लिया।

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