Tuesday, 01 December 2020

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कहानी ऐसी कि खुश हो गई संपादक

चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन भी बच्चों ने दिखाया जोश

कहानी ऐसी कि खुश हो गई संपादक

बीकानेर। देश का पहला चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल बुधवार को उस समय सफल नजर आया जब छोटे छोटे बच्चों ने अपनी कल्पनाओं के घोड़े दौड़ाते हुए कहानियां लिख डाली। इन कहानियों के पात्र हालांकि उनके फेवरेट चैनल कार्टून के पात्र ही थे, लेकिन कहानी लिखने की यह शुरूआत ही इस साहित्यिक आयोजन की सफलता बता रहे थे। 

हर बच्चा बना कार्टूनिस्ट
यहां अंत्योदय  नगर स्थित रमेश इंग्लिश स्कूल में फेस्टिवल के दूसरे दिन खुले सत्र में बच्चों ने कहानियों के साथ ही कार्टूनिंग की। देश के प्रख्यात कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी ने बच्चों को बताया कि कार्टून के लिए चित्रकला विषय होना अनिवार्य नहीं है। आडी-तिरछी लकीरों के साथ अपना स्वयं का पात्र बना सकते हैं और उसी पात्र के साथ अपनी अभिव्यक्ति भी कर सकते हैं। तिवारी ने जब बच्चों को कूंची में हाथ में लेकर कार्टून बनाने के लिए कहा तो उपस्थित करीब दो सौ बच्चों ने पात्र बना दिए। किसी ने राजनीतिक पार्टियों पर कटाक्ष किया तो किसी ने अपने आसपास के वातावरण को कागज पर उतारा। इसके बाद तिवारी ने सभी कार्टून पर अपने हस्ताक्षर किए।

कहानी ऐसी कि खुश हो गई संपादक
नंदन की संपादक जयंती रंगनाथन ने जब बच्चों को कहानी लिखने के गुर सिखाए तो हर बच्चा कहानीकार हो गया। दस-दस के झुंड में बच्चों को बिठाया गया। इस बात का खास ध्यान रखा गया कि एक ही स्कूल के बच्चे साथ नहीं बैठें, बल्कि अलग अलग स्कूल के बच्चे बैठें। फिर इन बच्चों को एक विषय दिया गया। रंगनाथन के बताए विषय  पर बच्चों ने एक दूसरे के साथ चर्चा करते हुए कहानी लिखी। दस दस बच्चों के करीब पच्चीस झुंड से कहानियां निकलकर आई तो वो स्वयं दंग रह गई। बाद में उन्होंने तीन कहानियां चयनित की और लेखक बच्चों को बुलाकर स्टेज पर इन कहानियों का वाचन करवाया। ऐसा नहीं लगा कि बच्चों ने पहली बार कविता लिखी हो।

कैसे लिखें कविता विषय पर लगी क्लास
दूसरे सत्र में साहित्यकार मंगत बादळ, मालचंद तिवारी, दयानन्द शर्मा, इरशाद अजीज, बुलाकी शर्मा, प्रितपाल कौर ने बच्चों को कविता लेखन के बारे में जानकारी दी। तुकबंदी कविताएं बच्चों से हाथों हाथ बनवाई। बाल साहित्यकार दयानन्द शर्मा ने बताया कि बच्चों को जैसे ही एक शब्द दिया, उन्होंने वैसे ही अपनी कविताएं लिखनी शुरू कर दी। यह अद्भुत अनुभव था।

दूसरे दिन भी खूब हुआ 'ड्रामा' 
फेस्टिवल में बच्चों ने थियेटर में विशेष रुचि ली। लगातार दूसरे दिन जयपुर से आए गगन मिश्रा ने ड्रामा के बारे में बात की।इस दौरान वरिष्ठ रंग निर्देशक विपिन पुरोहित भी उनके साथ थे। पुरोहित ने ड्रामा के कई गुर भी सिखाये।


आगाज के दिन बच्चों के सवाल में उलझ गए कई बड़े
बीकानेर। 'हम बच्चों पर ही कुछ बनने का इतना दबाव क्यों हैं?  'हम जो हैं, हम वैसा क्यों नहीं बन सकते?  'क्यों न मेरे पंख हो और मैं आसमां में उड़ता फिरूं?Ó ये सवाल तो गंभीर है लेकिन इन्हें पूछने वाला बाल मन है। महज बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई कर रहे बच्चों ने मंगलवार को देश के पहले 'चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल  में कुछ ऐसे ही गंभीर मुद्दे उठाकर मंच पर बैठे वरिष्ठ साहित्यकारों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
यहां अंत्योदय नगर स्थित रमेश इंग्लिश स्कूल में आयोजित चिल्ड्रन लिटरेचर फेस्टिवल के पहले दिन बच्चों ने साहित्य की दुनिया में जबर्दस्त विचरण किया। पहले सत्र में जयपुर से आए रंगकर्मी गगन मिश्रा ने बच्चों को बातों ही बातों में रंगमंच की बारीकियों से रूबरू करवा दिया। गगन ने बच्चों को एक से बारह तक की गिनती के साथ प्रत्येक अंक के साथ अभिनय की एक कला से जोड़ दिया। करीब एक घंटे के इस सत्र के बाद बीकानेर के प्रमुख विद्यालयों के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। बीकानेर के जिसस एंड मेरी स्कूल, आरएसवी स्कूल, सोफिया स्कूल, ल्याल पब्लिक स्कूल, जैन पब्लिक स्कूल, सेठ तोलाराम बाफना स्कूल, रमेश इंग्लिश स्कूल, केंद्रीय विद्यालय, बीकानेर पब्लिक स्कूल, विक्टोरियस पब्लिक स्कूल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेवगों की बगीची, सेंट्रल एकेडमी सहित बीस से अधिक विद्यालयों के बच्चों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। पहली बार एक ही मंच पर इन स्कूलों के बच्चों ने एक साथ अपनी प्रस्तुति दी, वो भी बिना किसी स्क्रिप्ट। 
मंच पर बैठे वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवारी, मधु आचार्य 'आशावादी , बुलाकी शर्मा, प्रमोद शर्मा, दयानन्द शर्मा ने जब लेखन में अनुशासन की बात कही, तो बच्चों ने भी जमकर अपने सवाल किए। बच्चों ने कहा कि आखिर हमारे ऊपर इतना दबाव क्यों है कि हम जो माता-पिता कहें, वो ही करें। आखिर हम अपनी मर्जी से लेखक और साहित्यकार क्यों नहीं बन सकते। एक बच्चे श्रेय हर्ष ने गगन मिश्रा से कहा कि कल्पना ऐसी हो कि मेरे पंख लगे और मैं उड़ता रहूं। कुछ बच्चों ने मौके पर ही लिखी अपनी कविताएं भी मंच पर सुनाई। अंग्रेजी और हिन्दी में लिखी इन कविताओं को सुनकर मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि 'इतने गहराई के भाव बच्चों में ही हो सकते हैं।Ó इन सत्रों का संचालन हरीश बी.शर्मा ने किया। 

मैं छिपकर लिखता था, क्योंकि लोग हंसी उड़ाते थे
आमतौर पर गंभीर मुद्दों पर ही बात रखने वाले देश के विख्यात चिंतक डॉ. नन्दकिशोर आचार्य आज बच्चों के कार्यक्रम में बहुत ही सहज और सरल नजर आए। उन्होंने अपने बाल्यकाल में साहित्यकारों की हालत पर बोलते हुए कहा 'तब हरीश भादाणी और यादवेंद्र शर्मा 'चंद्रÓ जैसे साहित्यकार हमारे सीनियर थे। उनकी इज्जत थी लेकिन हम नए लेखकों को मौका नहीं था। हम किसी को कहते कि कविता लिखते हैं तो लोग मखौल उड़ाते थे। इसलिए मैं छिपकर लिखता था। जब ज्ञानोदय में छपने लगा तब लोगों को पता चला मैं कविता लिखता हूं।Ó आचार्य ने बताया कि अज्ञेय की जीवनी मैंने दसवीं कक्षा में ही पढ़ ली थी। आज ऐसा माहौल नहीं है। उन्होंने अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बच्चों को उसकी मूल भाषा में भी विद्वान बनाया जा सकता है। 
आज बच्चे सीखेंगे कार्टून
बच्चों को बुधवार को कार्टूनिंग का अवसर मिलेगा। देश के प्रख्यात कार्टूनिस्ट अभिषेक तिवारी सुबह दस बजे के पहले खुला सत्र में बच्चों को कार्टून की बारीकियों से रूबरू करेंगे। इस दौरान बच्चों को अपने साथ एक शीट लेकर आनी होगी।
्रकैसे बनती है कहानी?
कहानी कैसे लिखी जाती है और उसमें पात्र कहां से आते हैं। यह जानकारी नंदन की संपादक जयंति रंगनाथन देगी। हमारे आसपास घटने वाली घटनाओं से कहानी बनाने का तरीका भी सिखाएंगी।  उनके साथ ही दिल्ली की विख्यात साहित्यकार प्रितपाल कौर भी विचार रखेगी।

पुस्तक मेले में भी खरीदी पुस्तकें
फेस्टिवल के साथ ही तीन दिन का पुस्तक मेला भी शुरू हुआ, जिसमें बच्चों ने पुस्तकों की खरीद की। छोटे बच्चों ने कई बड़े साहित्यकारों की पुस्तकों को पहली बार देखा। 

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