Thursday, 26 November 2020

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मां नागणेची माता को इत्र-गुलाल से होली खेलाकर किया होलका का आगाज़

मन्दिर परिसर में भजनों की प्रस्तुति के साथ हुई पुष्पवर्षा, देर रात निकली शाकद्वीपीय समाज की गैर

मां नागणेची माता को इत्र-गुलाल से होली खेलाकर किया होलका का आगाज़

बीकानेर। शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज द्वारा   नागणेची जी मन्दिर में मंगलवार को खेलनी सप्तमी के अवसर पर मां भगवती के समक्ष भजनों की प्रस्तुति की गई और इत्र-फल व गुलाल से फाग खिलाई गई। अष्टादशभुज माता की प्रतिमा का शृंगार कर उनको खिलाई फाग के साथ ही बीकानेर शहर में होली का विधिवत आगाज हुआ। 
मंगलवार शाम को आयोजित हुए इस आयोजन में हंस चढ़ी मां आई भवानी रे..., निम्बूड़ो..., पन्नो रे म्हारी जोड़ रो... बीकाणे रो बासी रे के साथ मुजमानी के सरीखे भजनों की स्वर लहरियां गूंज उठी। भक्ति से सराबोर हो उठे इस माहौल में शाकद्वीपीय ब्राह्मण विकास समिति की ओर से मां भगवातीके चरणों में अर्पित गुलाब से यहां मौजूद भक्तों को फूलों कीहोली खिलाई गई। भजन गाने वालों में सुशील सेवग (लालजी), घेवर जी भादाणी, दारसा जोशी, मेघसा, विष्णु सेगव, अजयकुमार देराश्री, मुन्ना भा, नितिन वत्सस, रामजी सेवग, नारायण सेवग, कस्तुरचन्द सेवग, अरुणकुमार (गुड्डा), रघुजोशी, बलू जोशी, राजा जोशी, पुरषोतम सेवग, सरजू नारायण शर्मा के साथ शाकद्वीपीय समाज के बन्धु और मरुनायक मित्र मण्डल ने भजनों की प्रस्तुति दी।
पूजा अर्चना के बाद भगवाती के राबडिय़ा व फलों का भोग लगाया गया। इसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर शाकद्वीपीय समाज की ओर से सामूहिक गोठ का आयोजन हुआ। शाकद्वीपीय इस पावन पर्व पर सामुहिक भोज का आयोजन सामाजिक स्तर पर सूर्य भवन-नाथसागर, मुन्धाड़ा सेवगों की बगेची-नत्थूसर गेट, हंसावतों की तलाई-गंगाशहर रोड, शिवशक्ति भवन-डागों चौक, जेनेश्वर भवन-जसोलाई तलाई व मदन मोहन भवन-मोहता चौक आदि में हुई। गौठों में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। खेलनी सप्तमी के दिन शाकद्वीपीय समाज की गैर निकाली गई। रात्रि करीब दस बजे गोगागेट से निकाली गई गैर गोगागेट से निकाली गई जो कि बागड़ी मोहल्ला, भुजिया बाजार, चायपट्टी, बड़ा बाजार, नाइयों की गली, मरुनायक चौक होते हुए सेवगों केचौक में सम्पन्न हुई। गैर में अलग-अलग समुह में शाकद्वीपीय समाज के लोग 'ओ लाल केशा, पापड़ली और परम्परागत गीत गाते हुए चल रहे थे। चित्र साभारः बीकानेर हलचल

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