Thursday, 26 November 2020

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युवाओं ने जाना बीकानेर का मौखिक इतिहास

युवाओं में लोक व स्थानीय इतिहास के प्रति चेतना जगाने तथा उन्हें इसके प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देष्य से उस्ता बारी के अंदर ‘‘चेंज हाट”  में ‘बीकानेर का मौखिक इतिहास’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। 28 दिसम्बर, रविवार को आयोजित हुए इस संवाद कार्यक्रम के मुख्य वक्ताओं के रूप में इतिहासविद् व लोक कला मर्मज्ञ श्री कृष्ण चन्द्र शर्मा व डाॅ. श्रीलाल मोहता ने बीकानेर के इतिहास पर युवाओं को संबोधित किया। सर्वप्रथम डाॅ. श्रीलाल मोहता ने वेद और पुराणों का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय परंपरा में इतिहास शब्द का प्रचलन नहीं रहा बल्कि उस समय का काल बोध मौखिक परंपरा व उसके समकालीन रूपों जैसे पुराण यानी पुराना इत्यादि के रूप में मिलता है। यह इतिहास को देखने की एक अलग दृष्टि थी जिसमें पलक झपकने से लेकर युगों तक की गणना करना इतना आसान रहा था। इसके पश्चात् उन्होंने बीकानेर की स्थापना के पीछे की कहानियों व कथाओं का उल्लेख करते हुए पिछले 500 वर्षों का एक दृश्य प्रस्तुत किया।

इसके पश्चात् श्री कृष्ण चन्द्र शर्मा ने बीकानेर की कला परंपराओं, कारीगरी, मेलों, रीति-रिवाजों व इसकी बसावट के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीकानेर के चोकों व अन्य बसावट जातियों, वर्णों व व्यापार के हिसाब से हुई। उन्होंने बीकानेर के विभिन्न प्रसिद्ध स्थानों के पीछे के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा श्री शर्मा ने बीकानेर की गणगौर परंपरा, राजशाही व्यवस्थाओं व अन्य रोचक मिथकों व कहानियों को भी वहां उपस्थित संभागियों को स्पष्ट किया।

Youth of Bikaner listening History by Dr Shri Lal Mohta - Director of Maru Parampra at Haat

संवाद के दौरान अनेक युवाओं ने सामंतशाही व्यवस्थाओं में होने वाले स्त्री अत्याचार, उनकी भूमिका पर भी अनेक प्रश्न उठाए। वहां उपस्थित संभागियों ने मौखिक इतिहास में प्रचलित कहानियों व कथाओं पर भी अनेक जिज्ञासाएं शांत की। उन्होंने बीकानेर की स्थापना, राजाओं के रहन-सहन, आम लोगों के साथ उनका जुड़ाव, राज-व्यवस्थाएं, विकास में राजाओं का योगदान के अलावा अनेक एतिहासिक संदर्भों को लेकर सवाल-जवाब किये।

कई युवाओं ने इच्छा जाहिर की कि आगे भी इस तरह के संवाद इतिहास के अलग-अलग विषयों पर आयोजित किये जाएं। कार्यक्रम के अंत में सभी संभागियों ने वक्ताओं का आभार व्यक्त भी व्यक्त किया। कार्यक्रम में विद्यार्थी, लोक कलाकार, लेखक, पत्रकार तथा स्थानीय इतिहास में रूचि रखने वाले सुधीजन मौजूद थे.

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