Saturday, 16 January 2021

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लक्षचण्डी महायज्ञ की पूर्णाहुति आज

धरणीधर महादेव मंदिर में संस्कृत महाविद्यालय का भव्य उद्घाटन

बीकानेर, ११ मार्च । धर्म नगरी बीकानेर के श्रीरामसर रोड पर स्थित धरणीधर महादेव मंदिर में महामण्डलेश्वर स्वामी श्री प्रखरजी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्री लक्षचण्डी महायज्ञ में चल रहे श्री मद्भागवत, संत समागम, सुंदर काण्ड पाठ, रासलिला में बडी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। यज्ञ स्थल पर चल रही श्री मद् भागवत कथा का आज समापन हो गया धरणीधर महादेव मंदिर में प्रखर परोपकार मिशन धरणीधर संस्कृत महाविद्यालय का उदघाटन सम्पन्न हुआ । लक्षचण्डी महायज्ञ की पूर्णाहुति सोमवार को सुबह १२ बजे होगी। महायज्ञ समिति के महामंत्री रामकिशन आचार्य ने बताया कि इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महामण्डलेश्वर स्वामी श्री प्रखर जी महाराज ने कहा कि हर राष्ट्र शिखर पर पंहुचना चाहता है। इसके लिए सब अपना अपना तरीका अपनाते है। उन्होंने कहा कोई भी अपनी संस्कृति को त्यागे नहीं, जिस जाति के जीवन मूल्य सुरक्षित रहते है। वहां कोई हाथ नहीं डाल सकता। उन्होने कहा अंग्रेजा के जाने के बाद भी अंग्रेजी संस्कृति नहीं गइ्रर् अपितु हमारी संस्कृति गायब होने लगी । उन्होने आव्हान किया कि हमे पूनः हमारी संस्कृति को अपनाना होगा। जिससे हम पुनः विश्व गुरू बन सके। महाराज ने कहा कि २०१० तक भारत आर्थिक रूप से सुदृढ राष्ट्र होगा । संस्कृत महाविद्यालय रायसिंहनगर के प्राचार्य सज्जन शास्त्री ने कहा कि विद्या वही है, जो मुक्ति प्रदान करे ना कि बंधन दे । उन्होने कहा वर्तमान भावी महाविधालय की रूपरेखाओं से श्रोताओं को अवगत कराया । इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. बी. डी. कल्ला ने कहा कि संस्कृत देव भाषा है। यही विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है। उन्होंने कहा परोपकार से बडा धर्म नहीं है व दूसरो को कष्ट पंहुचाने से बडा पाप नहीं है। हमारे वेद पुरान ज्योतिष आयुर्वेद सभी संस्कृत मे है। संस्कृत को अपनाकर हम विश्व में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकते है। कल्ला ने कहा कि प्रस्तावित महाविद्यालय से हमारी संस्कृति का पुनरोद्धार होगा। कल्ला ने विधायक कोटे से संस्कृत महाविद्यालय को सहयोग देने की घोषणा की । इस अवसर पर कल्ला ने आम जन से आव्हान किया कि वे तन मन धन से इस महाविद्यालय हेतु सहयोग करे इस अवसरपर दूसरे मुख्य अतिथि वित आयोग के अध्यक्ष माणिकचंद सुराणा ने कहा कि लक्ष चण्डी महायज्ञ से बीकानेर वासियों की नैतिक मूल्यों को ऊर्जा मिली है। प्रखरजी महाराज के व्यक्तित्व व वाणी में प्रखरता है। सुराणा ने संस्कृत महाविद्यालय के लिए सरकारी भवन की उपलब्धता का आश्वासन दिया। सुराणा ने कहा कि विद्वान संस्कृत भाषा के माध्यम से अन्य विषयों का भी अध्यन्न करें । बीकानेर विश्व विद्यालय के कुलपति सी.बी.गैना ने कहा कि एक दौर था जब पूरे भारत में संस्कृत एक समृद्ध भाषा के रूप में थी । संस्कृत एक भाषा ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति का विश्व कोष है। यह हमे शास्त्रों का ज्ञान देती है। संस्कृत के विकास का कार्य सरकारो के माध्यम से उतना संभव नहीं है जितना की प्रखरजी महाराज जैसे विद्वान उसे कर सकते है। यहां इस महाविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र इसे अपने जीवन में उतार सकेंगे। गैना ने इस महाविद्यालय के भावी छात्रों व प्राचार्य बालकिशन तिवाडी को बधाई दी । इससे पूर्व स्वागत भाषण करते हुए धरणीधर ट्रस्ट के रामकिशन आचार्य ने कहा कि धरणीधर के परिसर के उपयोग हेतु महाराज से निवेदन किया गया था महाराज ने उक्त निवेदन मानकर आज यह संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना का मूहुर्त निकाला। भविष्य में यहां एक स्कूल व अस्पताल की स्थापना भी प्रखर परोपकार मिशन द्वारा प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय की स्थापना से आस पास के क्षेत्रो में शिक्षा का प्रसार प्रचार होगा । आचार्य ने ट्रस्ट की ओर से इस महाविद्यालय के संचालन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया । धन्यवाद भाषण देते हुए महायज्ञ समिति के अध्यक्ष सुभाष मित्तल ने इस महाविद्यालय की स्थापना भावी पीढी के लिए शुभ संकेत बताया। कार्यक्रम के अंत में महायज्ञ समिति के श्रीधर शर्मा रामकिशन आचार्य व सुभाष मित्तल ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। यज्ञशाला में यज्ञ के आचार्य पं. लक्ष्मीकान्त दीक्षित के सानिध्य में सभी यजमानों ने यज्ञ मण्डप में सभी आवाहित देवताओं का पूजन किया। यज्ञ मण्डप में होने वाले हवन में यजमानों द्वारा आहूतियंा दी जा रही है। महायज्ञ में रविवार को कन्याकुमारी , बटुक सहासिनी व सौभाग्यवती पूजन के अलावा विशेष सामग्री द्वारा हवन किया गया। महायज्ञ स्थल पर कोलकाता के पण्डित श्रीकान्त शर्मा ने श्रीमद् भागवत कथा का आज समापन हो गया । समापन अवसर पर आरती के समय हजारों की तादात में श्रद्धालु उपस्थित थे। कथा के समापन पर पण्डित श्रीकान्त शर्मा का महायज्ञ समिती के रामकिशन आचार्य, सुभाष मित्तल मधुसुदन आसोपा, मनमोहन कल्याणी , राजेश चूरा, चिरजीगुरू, तोलाराम पेडवाल, श्रीधर शर्मा ने अभिनन्दन किया । महायज्ञ स्थल पर चार पाठशालाओं में चल रहे दुर्गा सप्तशती के पाठों से धरणीधर क्षेत्र में वातावरण धर्ममय बना हुआ है।

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