Saturday, 16 January 2021

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लक्षचण्डी महायज्ञ स्थल पर रामकथा व रासलीला शुरू

रामकथा में पंडित भारद्वाजजी ने गुरूवार को रामकथा क्यो सुननी चाहिए, क्यो कहनी चाहिए, रामनाम की महिमा पर व्याख्यान दिया। उन्होने कहा कि आज दुनिया के ५० लाख अंग्रेज रामनाम की माला जप रहे है। यह राम के नाम का ही प्रताप है कि मांसाहारियों के हृदय में भी परिवर्तन हुआ है।

बीकानेर २२ फरवरी। श्रीरामसर रोड स्थित धरणीधर महादेव मंदिर में महामण्डलेश्वर स्वामी श्री प्रखरजी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्री लक्षचण्डी महायज्ञ में श्रद्वालुओं का सैलाब उमड रहा है। यज्ञ स्थल पर चल रही रासलीला एवं संगीतमय रामकथा में हजारो श्रद्वालु भक्त प्रतिदिन पंहुच रहे है। रामकथा व रासलीला के समय खचाखच पांडाल भरे रहते है। वहीं यज्ञ की परिक्रमा का सिलसिला गुरूवार को भी जारी रहा। महायज्ञ समिति के महामंत्री रामकिशन आचार्य ने बताया कि यज्ञ के आचार्य पं. लक्ष्मीकान्त दीक्षित के सानिध्य में सभी यजमानो ने यज्ञ मण्डप में सभी आवाहित देवताओं का पूजन किया एवं सभी मण्डप का पूजन हुआ। यज्ञ मण्डप में होने वाले हवन में दी जाने वाली पवित्र आहूतियों से धरणीधर क्षेत्र में वातावरण पवित्र हो गया है। यज्ञ स्थल पर एक विशाल पाण्डाल में हाल ही निर्मित सर्वप्रथम यज्ञ के प्रधान देवता भगवती राज-राजेश्वरी, दुर्गाजी, गणेशजी, कुबेर जी, लक्ष्मीजी, सरस्वतीजी, मातंगी देवी, कामाक्षा देवी, छिन्न मस्ता देवी एवं देवताओं की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा हुई। प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के समय स्वामी श्री प्रखरजी महाराज की उपस्थिति में यज्ञ के आचार्य पं. लक्ष्मीकान्त दीक्षित एवं उनके विद्वानों द्वारा करवाई गई। इस अवसर पर यज्ञ समिति के अध्यक्ष सुभाष मितल, महामंत्री रामकिशन आचार्य, कोषाध्यक्ष मनमोहन कल्याणी, चिरंजी गुरू, मधुसूदन आसोपा सहित यज्ञ समिति से जुडे सैकडो कार्यकर्ता व हजारो श्रद्वालु उपस्थित थे। यज्ञ स्थल पर बुधवार रात्रि वृन्दावन से पधारी राधा सर्वेश्वर रास मंडली द्वारा पं. शिवदयाल गिरीराज की मंडली ने रासलीला का शुभारम्भ किया। रास लीला में मंडली के कार्यकर्ताओं ने बहुत ही सुदंर लीला का मंचन कर श्रद्वालुओं को भक्ति सागर में गोते लगाए। रास लीला में कष्ण जन्म लीला एवं मयूर नृत्य लीला का मंचन हुआ। रासलीला में मयूर लीला के प्रसंग में बताया गया कि राधाजी के मन में एक दिन मयूर नृत्य देखने की इच्छा हुई तो भगवान ने स्वयं मयूर बनकर राधाजी के समक्ष नृत्य प्रदर्शन किया। रासलीला के दौरान मंच पर बैकग्राउंड में बताया गया कि जब जीव सर्वरूप से परमात्मा पर निर्भर हो जाता है तो परमात्मा उसकी इच्छानुसार कार्य करते है व उस भक्त की मुश्किलों को आसान कर देते है। रासलीला में प्रभावी मंचन व कलाकारों के सधे हुए अभिनय को देखकर श्रद्वालु भक्तों में मंचस्थ कलाकारों के पांव छूने की होड सी मच गई। रासलीला के दौरान महिलाओं की खासी तादाद को देखते हुए पांडाल में उनके बैठने की अलग से विशेष व्यवस्था की गई है। महायज्ञ स्थल पर गुरूवार को पंडित श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज द्वारा संगीतमय रामकथा का शुभारम्भ हुआ। रामकथा को सुनने के लिए तय समय से पहले ही रामभक्त पाण्डाल में बैठने शुरू हो गये। महाराज के आने तक श्रीराम संकीर्तन एवं श्रीकृष्ण एवं अन्य प्रकार के भजन कीर्तन होते रहे। रामकथा वाचक पं. अतुल कृष्ण भारद्वाज के आने पर महायज्ञ समिति के महामंत्री रामकिशन आचार्य ने रामकथा की विधिवत पूजा विद्वान पंडितो के साथ की, उसके बाद रामकथा का विधिवत् शुभारम्भ हुआ। रामकथा में पंडित भारद्वाजजी ने गुरूवार को रामकथा क्यो सुननी चाहिए, क्यो कहनी चाहिए, रामनाम की महिमा पर व्याख्यान दिया। उन्होने कहा कि आज दुनिया के ५० लाख अंग्रेज रामनाम की माला जप रहे है। यह राम के नाम का ही प्रताप है कि मांसाहारियों के हृदय में भी परिवर्तन हुआ है। पं. भारद्वाजजी ने पंचदेव पूजन यथा गणेश, पार्वती, शंकर, सूर्य एवं विष्णु भगवान की पूजा करने का आहृवान श्रद्वालुओं के समक्ष किया। संगीतमय रामकथा में हारमोनियम पर पंकज, तबले पर राधेश्याम,वायलिन पर अविनाश ने संगत की। वहीं गायन का दायित्व ओंकारजी ने निभाया। यहां उल्लेखनीय पं. अतुल कृष्ण भारद्वाज उतर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के बिलारी कस्बे के निवासी है। पं. भारद्वाज ने रसायन शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से जनसम्फ एवं पत्रकारिता के स्नातकोत्तर डिप्लोमा में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। बचपन में ही घर के संस्कारो व सद्गुरूओ की संगत में आने के बाद पं. भारद्वाज का रूझान धर्म की ओर हो गया, इसी का परिणाम है कि आज पं. भारद्वाज देश के चोटी के रामकथा वाचको में से एक है। पं. भारद्वाज ने धर्म की शिक्षा प्रख्यात रामकथा वाचक पूज्य श्री विजय कौशलजी महाराज से प्राप्त की।

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