बीकानेर, इस बाजारवादी युग में सवेदना को बचाना एक बडी चुनौती है, जिसे साहित्य के माध्यम से ही साधा जा सकता है। ये विचार राजस्थानी के प्रसिद्ध कवि-समालोचक डॉ आईदान सिंह भाटी ने व्यक्त किए। वे षुक्रवार को होटल मरूधर हैरिटेज के विनायक सभागार में कथेसर पत्रिका, आसोज मांय मेह व बातों री ओबरी के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि पद से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज के राजनीतिक पतन के दौर में साहित्यकार का काम करूणा को बचाना है और कथेसर इस कार्य के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ उपन्यासकार अन्नाराम सुदामा ने की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि रोटी की लडाई व गांव की समस्याओं को जमीन से जुडे लोग ही उठा सकते हैं। कथेसर पत्रिका संपादक मंडल ने राजस्थानी की बहुत बडी जिम्मेदारी ली है। इस कार्य के लिए में संपादक रामस्वरूप किसान, डॉ सत्यनारायण सोनी बधाई के पात्र हैं।
इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार व कथेसर के संपादक रामस्वरूप किसान ने कहा कि पत्रिका का उदेष्य राजस्थानी साहित्य को षिखर पर पहुंचाना है और हम राजस्थानी के लेखकों की खेप तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए मैं अपने सृजन की आहुति भी देने को तैयार हूं।
इस मौके पर कवि निषांत के कविता संग्रह- आसोज मांय मेह- व संदीप मील के बाल कहानी संग्रह -बातां री ओबरी का भी विमोचन किया गया।
इस दौरान मदनगोपाल लढा ने कथेसर पत्रिका, सतीष छिंपा ने आसोज मांय मेह व राजूराम बिजारणियां ने बातां री ओबरी कृति पर पत्र वाचन किया। इससे पूर्व कार्यक्रम की षुरूआत युवा कवि विनोद स्वामी ने वाणी वंदना से की। मोटयार परिशद के प्रदेष सह-संयोजक सुरेंद्र सिंह षेखावत ने भाशा की मान्यता का मुद्दे पर कहा कि यह सवाल आठ करोड लोगों की अस्मिता से जुडा हुआ है जिसे लम्बे समय तक टाला नहीं जा सकता।
गौरतलब है कि कथेसर पत्रिका के ईसंस्करण का लोकापर्ण २० मई को दक्षिण कोरिया के ग्वांचु षहर में होगा। जहां राजस्थानी प्रवासियों के साथ कोरिया के साहित्यकार उपस्थित होंगे।
इस अवसर पर बोधी प्रकाषन के माया मृग का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम के विषिश्ठ अतिथि खिनाणियां सरपंच व किसान नेता छोटूराम कासणियां, पीआर लील, एडवोकेट उपध्यान चंद्र कोचर ने भी विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर वरिष्ठ कवि भवानी षंकर व्यास विनोद, मालचंद तिवाडी, डॉ मदन सैनी, कवि भंवरलाल भंवरो सहित बडी संख्या में साहित्यकार व भाशा प्रेमी उपस्थित थे। मंच संचालन प्रमोद कुमार षर्मा व रचना षेखावत ने किया। इस अवसर पर बोधि प्रकाषन ने पुस्तक प्रदर्षनी लगाई।
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