Tuesday, 30 May 2017

बलिदान के महत्व से अनजान नई पीढ़ी: व्यास

बलिदान के महत्व से अनजान नई पीढ़ी: व्यास

बीकानेर, आज़ादी का इतिहास स्याही से नहीं ख़ून से लिखा गया था लेकिन अफसोस इस बात का है कि जिनके लिए शहीदों ने कुर्बानियां दी आज उनके बलिदान से अनजान है। नई पीढ़ी के लिए ये विचार शहीदे आजम अशफाक उल्लाह खां की 88वीं बरसी के अवसर पर फ्रेण्ड्स एकता संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम मंे अध्यक्ष के रूप मंे वरिष्ठ साहित्यकार भवानी शंकर व्यास विनोद व्यक्त कर रहे थे।
भवानी शंकर व्यास विनोद ने नई नस्ल को शहीदों के इतिहास और विचारांे से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि के रूप मंे बोलते हुए व्यंग्यकार कथाकार बुलाकी शर्मा ने अशफाक उल्लाह खां को प्रेरणा पुरूष बताते हुए कहा कि अल्प आयु मंे बिस्मिल के सानिध्य मंे शहीदे आजम ने जो महानता अर्जित की उस पर हमारा देश हमेशा गर्व करता रहेगा। अशफाक उल्लाह खां की स्मृति मंे शहर की शख्सियात मंे सम्मानित करने की परम्परा को अद्भुत बताया। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ शाइर मौलाना अब्दुल वहीद अशरफी ने भारतीय संस्कृति की विशेषता बयान करते हुए कहा कि अशफाक उल्लाह खां और रामप्रसाद बिस्मिल की दोस्ती युगों-युगों तक मिसाल रहेगी।
संस्थान अध्यक्ष वली मोहम्मद गौरी ने संस्था की गतिविधियों की विस्तार से जानकारी देते हुए शहीदे आजम की याद मंे प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले कार्यक्रम के प्रारंभ होने की दास्तान बयान की तथा कहा कि संस्थान का उद्देश्य है कि नई पीढ़ी को आजादी के इतिहास से परिचित करवाया जाये।
स्तम्भ लेखक, कथाकार नदीम अहमद नदीम ने अशफाक उल्लाह खां के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत पत्रवाचन करते हुए शहीदे आजम के जीवन के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। पत्रवाचन करते हुए नदीम अहमद नदीम ने कहा कि अशफाक उल्लाह खां आजादी के दीवाने थे जो हर हाल में देश को आजाद होते देखना चाहते थे।
कवयित्री और उर्दू शिक्षिका सीमा भाटी ने बेहतरीन अन्दाज मंे अशफाक उल्लाह खां की ग़ज़लों और नज़्मों की प्रस्तुति दी। सीमा भाटी की प्रस्तुति को प्रशंसा मिली।
साहित्य रंगमंच और समाजसेवा को सम्बंधित बीकानेर की पांच शख्सियात को सम्मान पेश किया गया। मधु आचार्य आशावादी (हिन्दी), अमीनुद्दीन “शौक” जामी (उर्दू), शंकरसिंह राजपुरोहित (राजस्थानी), सुधेश व्यास (रंगकर्मी), मोहम्मद इकबाल (समाजसेवा) को सम्मानित होने पर उपस्थित लोगों ने बधाईयां दी। सम्मानित होने वाले हजरात को शाॅल, श्रीफल, सम्मान-पत्र, प्रतीक चिन्ह एवम् सोशल प्रोग्रेसिव सोसाइटी बीकानेर की ओर से नदीम अहमद नदीम ने साहित्य भेंट किया।
कार्यक्रम का संचालन युवा कवि कथाकार हरीश-बी-शर्मा ने किया साथ ही अशफाक उल्लाह खां के जीवन से सम्बंधित रोचक पहलू भी अपनी रोचक शैली मंे प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सार्थक बनाया।
आभार व्यक्त करते हुए एडवोेकेट शमशाद अली ने उपस्थित लोगों से संस्थान को भविष्य में भी सहयोग करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राजेन्द्र जोशी, सुरेश हिन्दुस्तानी, शमीम बीकानेरी, जाकिर अदीब, मोहम्मद अफजल सिद्दीकी, आत्माराम भाटी, मोहम्मद रमजान अब्बासी, कासिम बीकानेरी, असद अली असद, राजाराम स्वर्णकार, मुरली मनोहर के. माथुर, जब्बार बीकाणवी, डाॅ. सुलक्षणा दत्ता, सैय्यद अख्तर अली, गजनफर अली, अतहर अली, हनीफ गौरी, हाजरा चैहान, सुल्ताना बानो, सैय्यद अब्दुल सलाम, फकरूदीन, दाऊद राठौड़ आदि की गरिमामय उपस्थित रही।