Tuesday, 17 October 2017

राजस्थान दिवस के कार्यक्रम में सफाई को नहीं किया शामिल

सरकारी कार्यालयों तक ही सिमटी रहेगी साज सज्जा

राजस्थान दिवस के कार्यक्रम में सफाई को नहीं किया शामिल

बीकानेर। शहर में राजस्थान दिवस को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, लेकिन इन कार्यक्रमों में कहीं भी गंदगी से त्रस्त शहर की सफाई को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्थान दिवस पर होने वाले कार्यक्रम महज सरकारी विभागों के इर्दगिर्द सिमट कर रह जाएंगे। यहां सवाल उठता है कि क्या राजस्थान दिवस पर प्रतियोगिताएं व प्रदर्शनी पर पैसा खर्च किया जाना जरूरी है या जर्जर सड़कों व गंदगी से त्रस्त जनता को राहत देना आवश्यक है। सड़क नालियां भी तो सरकारी विभाग की ही है तो फिर कार्यालयों को ही क्यों सजाया जाता है? यह सही है कि प्रदेश की स्थापना दिवस की खुशी के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए, लेकिन पहले अपना घर तो साफ-सुथरा रखना चाहिए। शहरभर में सफाई कार्यक्रम चलाने से पूरा शहर इस दिवस में शामिल हो सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार तो सरकारी अधिकारी, कर्मचारी सहित चंद लोग ही शामिल हो पाएंगे। फिर ऐसे कार्यक्रम की सार्थकता क्या रह जाती है। 

राजस्थान दिवस कार्यक्रम की शुरुआत 17 मार्च को 'रन फोर राजस्थानÓ दौड़ से होगी।  इस श्रृंखला में पारम्परिक खेलकूद प्रतियोगिताएं, क्राफ्ट बाजार, विकास एवं फोटो प्रदर्शनी आदि कार्यक्रम आयोजित होंगे। विभिन्न सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक भवनों और स्मारकों पर रंग-बिरंगी लाइटिंग की जाएगी। सभी कार्यक्रमों के सफल आयोजन के संबंध में मंगलवार को अतिरिक्त जिला कलक्टर (नगर) एस.के. नवल की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में नगर विकास न्यास, पर्यटन विभाग सरीखे कई विभाग के अधिकारी शामिल हुए, किसी का भी शहर की कॉलोनियों व परकोटे के हालात पर ध्यान नहीं गया। एक ओर शहर के कई इलाके, ओवर ब्रिज आदि क्षेत्र अंधेरे में डूबे रहते हैं वहीं दूसरी ओर सरकारी कार्यालय रंगबिरंगी रोशनी से सजाया जाएगा। यह कवायद किसके लिए और किसके पैसे की जा रही है। इस पर प्रशासन को न केवल विचार करना चाहिए बल्कि को जनता को इन सवालों का जवाब भी देना चाहिए। 30 मार्च को लक्ष्मीनाथ मंदिर और रसिक शिरोमणि मंदिर में विशेष पूजा करवाई जाएगी। यह काम तो मंदिर का पूजारी ही कर लेगा। यदि करना ही है तो मंदिर के रूके हुए विकास कार्य करवाने चाहिए।

 पर्यटन विभाग द्वारा 30 मार्च को सांस्कृतिक संध्या और आतिशबाजी की जाएगी। राजस्थान दिवस के अवसर पर ही जिले की झांकी बनाई जाएगी। क्या झांकी में स्वच्छ बीकाणा जैसे नारे देने वाला प्रशासन इस शहर व सीधे-साधे शहर वासियों का मजाक उड़ाएगा? सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का भी आयोजन होगा। क्या प्रशासन को इस बात का सामान्य ज्ञान है कि शहर के कौनसे वार्ड में कितने विकास की जरूरत है? खेलकूद विभाग द्वारा 26 से 28 मार्च तक पारम्परिक खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये प्रतियोगिताएं डॉ. करणीसिंह स्टेडियम में होंगी। इनमें खो-खो, रूमाल झपट्टा, सतोळिया, कबड्डी, रस्साकस्सी और कुश्ती की स्पर्धाएं होंगी। क्या शहर के अन्य स्टेडियम की हालत पर प्रशासन गौर करेगा।

वैलोड्रम जर्जर पड़ा है, एमएम ग्राउंड सहित अनेक खेल मैदान बुरे दौर से गुजर रहे हैं। प्रशासन इनका जीर्णोद्वार करके राजस्थान दिवस मनाता तो आमजन में अच्छा संदेश जाता।-बिंदुओं पर चर्चा की गई।  बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) भवानी शंकर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी, आरएसी की तीसरी बटालियन के डिप्टी कमांडेंट बन्ने सिंह, साइक्लिंग कोच श्रवण कुमार, स्काउट गाइड सीओ जसवंत सिंह राजपुरोहित, सहायक पर्यटन अधिकारी तरूणा शेखावत, अशोक कुमार, खेलकूद समन्वयक रामेन्द्र कुमार हर्ष, नगर विकास न्यास के अधिशाषी अभियंता प्रेम वशिष्ठ, नगर निगम के राजस्व अधिकारी जगमोहन हर्ष सहित विभिन्न अधिकारी मौजूद थे। 

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