Monday, 18 January 2021

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बायो रेमेडिएशन से ही सुधरेगी राजस्थान की नदियां

आस्ट्रेलिया की वैज्ञानिक संस्था आयड़ नदी सुधार से जुड़ेगी

उदयपुर, प्राकृतिक व जैविक तरीकों से ही आयड़ नदी सहित राजस्थान के समस्त तालाबों व नदियों का प्रभावी उपचार होकर प्रदूषण समस्या का निराकरण हो सकता है। यह विचार प्रदूषण - संदूषण निवारण पर विश्व की वैज्ञानिक संस्था सीआरसी केयर आस्ट्रेलिया के प्रमुख प्रो रवि नायडू ने विद्या भवन पाॅलिटेक्निक में व्यक्त किये।

उदयपुर चेम्बर आॅफ काॅमर्स एण्ड इन्डस्ट्री, झील संरक्षण समिति मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट, एएएमसी ट्रेनिंग सेन्टर आॅस्ट्रेलिया - इण्डिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चर्चा में डा नायडू ने कहा कि सतही जल, भूजल के प्रदूषण से सम्पूर्ण जीव जगत बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। नदियों की हालत बुरी है। ऐसे में सहभागिता व सहकारिता आधारित बायो रेमेडिएशन तकनीकीयां ही प्रभावी समाधान है।

Dr Ravi Naidu at Global Contaminatin Assessment and Bio Remediation of the Environment & Natural Reources, Udaipur
Conference Global Contaminatin Assessment and Bio Remediation of the Environment & Natural Reources, Udaipur

फिजी मूल के भारतीय, आस्ट्रेलिया के डा रवि नायडू ग्लोबल इन्स्टीट्यूट फोर एनवायरमेन्ट रेमडिएशन न्यू केसल यूनिवर्सिटी के संस्थापक निदेशक, कोपरेटिव रिसर्च सेन्टर फोर कोन्टामिनेशन आस्ट्रेलिया के निदेशक, यूनिवर्सिटी आॅफ साउथ आस्ट्रेलिया के सेन्टर फोर एनवायरमेन्ट रिस्क असेसमेन्ट एण्ड रेमेडिएशन के संस्थापक निदेशक हैं।
डा नायडू ने कहा कि सीआरसीकेयर तथा एएएमसी ट्रेनिंग सेन्टर आॅस्ट्रेलिया आयड़ नदी सुधार के विविध आयामों में सहभागिता को तैयार है। इसमें शोध, संवाद व फील्ड इम्पलीमेन्टेशन स्तर के कार्य सम्मिलित हैं। नायडू ने कहा कि वे पर्यावरणीय विज्ञान में अन्तरराष्ट्रीय शोध कंे लिए वांछित योग्यता वाले उदयपुर के युवाओं के लिए वित्त व्यवस्था से लेकर हर प्रकार का सहयोग भी करना चाहते हैं।विश्व के कई देशों में बायो रेमेडिएशन पर कार्य कर रहे डा नायडू ने आयड़ नदी उपचार की ग्रीन ब्रिज तकनीकी को प्रभावी तकनीक बताया। नायडू ने कहा कि भारत व आॅस्ट्रेलिया दोनों देशों ने पर्यावरण सुधार में साथ कार्य करने के लिए समझौता किया है। ऐसे में यदि राज्य सरकार, भारत सरकार के माध्यम से आॅस्ट्रेलिया सरकार को प्रस्ताव भेजे तो नदी सुधार के लिए वित्तीय व्यवस्था भी उपलब्ध हो सकती है। नायडू ने कहा कि वे इसमें पूर्ण सहायता करेगें।
मुख्य वन संरक्षक वेंकटेश शर्मा ने कहा कि आयड़ नदी सुधार सहित समस्त नदियों के सुधार को लेकर शासन व प्रशासन में संवेदनशीलता बड़ी है। पानी, जंगल, पहाड़ सभी काॅमन प्रोपर्टी रिसोर्स (साझा संसाधन सम्पत्ति )  है। सभी के सम्मिलित प्रयासों से ही इन्हें बचाया जा सकता है। शर्मा ने कहा कि आयड़ नदी व उदयपुर की झीलों के जलग्रहण क्षैत्र के प्रभावी सुधार व उपचार के लिए वन विभाग पूरी तरह से तत्पर है। 
राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जीएस टांक ने कविता से लेकर कानपुर नदी पर हुए अतिक्रमणों को तुरन्त हटानेे का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि प्रदूषण तत्वों का नदी में न्यूनतम ठहराव हो। एएएमसी ट्रेनिंग सेन्टर आॅस्ट्रेलिया - इण्डिया की निदेशक बी राजलक्ष्मी ने कहा कि घर के स्तर पर जागरूकता से नदी में प्रदूषक तत्वों को पहुँचने से रोका जा सकता है। राजलक्ष्मी ने कहा कि उदयपुर मं नदी सुधार के सम्मिलित प्रयासों में वे सहभागिता निभाना चाहती हैं।

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यूसीसीआई की आयड़ सुधार समिति के अध्यक्ष कोमल कोठारी, पाॅलिटेक्निक के प्राचार्य डा अनिल मेहता ने ग्रीन ब्रिज सुधार तकनीकी को प्रदर्शित किया तथा प्रसाशन व राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे जनसहभागिता को साथ लेकर नदियों -तालाबों को सुधारें।  विद्या भवन के अध्यक्ष अजय एस मेहता ने सामुदायिक सहभागिता को पर्यावरण सुधार की कुंजी बताया। वैज्ञानिक डाॅ एसबी लाल तथा उद्योगपति केपी सिंह ने जल गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया। ट्रस्ट अध्यक्ष विजयसिंह मेहता एवं सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने कहा कि आयड़ गंगा नदी का भाग है। इसके सुधार से ही गंगा में सुधार आयेगा। उदयपुर का स्वैच्छिक जगत इसमें पूर्ण सहभागी है। यूसीसीआई के अध्यक्ष वीपी राठी ने कहा कि उनका चेम्बर उद्योगों से अपशिष्ठ विसर्जन से पूर्व वांछित उपचार सुनिश्चित होने पर निगरानी रख रहा है। उद्योग जगत नदी सुधार में हर तरह से सहयोग करेगा।
नगर निगम के एसई अरूण व्यास तथा प्रन्यास के अधिशासी अभियन्ता मुकेश जानी, संजीव शर्मा, ने निगम व न्यास द्वारा नदी सुधार के प्रयासों की जानकारी दीं
कार्यक्रम में केन्द्रीय भूजल बोर्ड के पूर्व निदेशक ओपी माथुर, पूर्व मत्स्यकी उपनिदेशक इस्माइल अली दुर्गा, वास्तुविद् बीएल मंत्री, झील प्रेमी तेज शंकर पालीवाल, हाजी सरदार मोहम्मद, रमेश चन्द्र राजपूत ने भी सहभागिता की। 
 

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