नई दिल्ली। लोक सभा में गुरूवार को बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल ने शुन्यकाल के दौरान भारत में यू. के. व यू. एस.ए. भांति भारत में भी सजा के आयोग की स्थापना करने की मांग करते हुये कह कि भारत का न्यायशास्त्र यद्धपि बहुत पुराना है , लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में जो कानून को लागू करने वाली मशीनरी है , उससे जनता का विश्वास धीरे - धीरे उठता जा रहा है। इसका मुख्य कारण अपराध के मामलों में सजा बहुत कम लोगो को होना के कारण है। किसी केस मे कितनी सजा दी जाये इसके लिए भी न्यायालयो को विवेक की शक्तियां प्राप्त है। सी. आर. पी. सी. में ऐसे बहुत से प्रावधान है जिसके कारण न्यायालय निर्णय करते समय बहुत सी विवेकीय शक्तियों का तहत निर्णय करते है, एक ही तरह का केस होने के बावजूद भी कई बार न्यायधीश किसी केस में एक साल की सजा दे देते है और किसी केस मे सात साल की सजा दे देते है और कभी कभी न्यायधीश किसी को छोड भी देते है। ऐसी परिस्थितियां विश्व के अन्य देशों मे भी आई उन्होने अपने यहां पर सजा के आयोग बनाई जिसमें विशेषरूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाईटेड किंगडम मुख्य रूप से है। हमारी भी आई.पी.सी. और सी.आर. पी.सी के बहुत से प्रावधान उनके यहां लागू कानूनो से प्राप्त किये है , लेकिन भारत में इस विषय के सुधार के लिए ना तो अभी तक सजा के आयोग बनाया गया है और ना ही अभी तक सजा के आयोग बनाई गई है सांसद मेघवाल ने भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय से मांग की कि यू.के एव. यू.एस.ए की भांति भारत में भी सजा के आयोग की स्थापना की जावें और इसमें प्रमुख रिटायर्ड न्यायधीश , प्रसिद्ध वकील एवं गैर सरकारी संगठनों के तथा पुलिस अधिकारियों को सम्मिलित किया जावें। यह कमिशन अपने आप मे स्वतंत्र होऔर साल भर मे अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे जिससे सजा के आयोग भारत मे भी इबन सकें। |