Tuesday, 01 December 2020

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गोगेलाव बीहड़ तथा रोटू को अभ्यारण्य घोषित कराने की मांग

नागौर जिले के वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए दो अलग अलग स्थानों पर अभ्यारण्य घोषित कराने की मांग उठी है।अखिल भारतीय जीवरक्षा बिश्रोई सभा के जिलाध्यक्ष रामरतन बिश्रोई ने जिला कलक्टर नागौर को दो अलग-अलग पत्र लिखकर गोगेलाव बीहड़ तथा रोटू की सरकारी भूमि को अभ्यारण्य घोषित कराने की मांग की है। उक्त पत्र की प्रति राजस्थनकेवन मंत्री को भी भेजी है।जिलाध्यक्ष ने रोटू में वन्यजीवों की बहुलता और प्रकृति की विशेषताएं बताते हुए पत्र में लिखा है कि ग्राम रोटू की भूमि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र अद्वितीय घटना से जुड़ी हुई है। विक्रम सम्वत् 1572 में अक्षय तृतीया के दिन बिश्रोई धर्म के संस्थापक भगवान जम्भेश्वर ग्राम रोटू आए थे। 14000 भक्तों के साथ रोटू में रात्रि विश्राम किया था। उसी दिन भक्तों द्वारा धूप से बचाव की प्रार्थना की गई थी तो भगवान जम्भेश्वर ने खेजड़ी के 3700 पेड़ लगाये थे जो आज भी मौजूद है। गांव के लोग उन खेजडिय़ों की एक टहनी भी नहीं काटते हैं। पेड़ विशालकाय है। आज उन पेड़ों की संख्या 15000 से अधिक है। रोटू गांव की सीमा उन खेजडिय़ों के कारण अलग ही दिखती है। खेजडिय़ों का यह सुंदर बगीचा दर्शनीय है। पर्यावरण के ऐसे ऐतिहासिक स्थल ग्राम रोटू में चिंकारा हिरण, काले हिरण, बारहसिंगा हिरण, लोमड़ी, खरगोश, नीलगाय, वन बिलाव आदि बड़ी संख्या में विचरण करते है। प्रकृति की गोद में कुलांचे भरते हिरणों के झुण्ड बड़े ही मनोहारी लगते हैं। खेजड़ी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण उक्त क्षेत्र में चिडिय़ा, राष्ट्रीय पक्षी मोर, कबूतर सहित विभिन्न प्रकार के पक्षी हजारों की तादाद में निवास करते हैं। पेड़ों पर रैन बसेरा करने के बाद चुग्गे पानी की तलाश में उनको दूर दूर तक जाना पड़ता है। मगर शाम को पुन: उन्हीं वृक्षों पर आकर बसेरा करते हैं। अखिल भारतीय जीवरक्षा बिश्नेाई सभा जिला शाखा नागौर द्वारा कुछ समय पूर्व में भी रोटू में अभ्यारण्य बनाने की मांग की गई थी। उस समय वन विभाग द्वारा मौका रिपोर्ट तैयार की गई थी। वन्यजीवों के फोटो भी संकलित किए गए थे। भूमि भी चिन्हित की गई थी मगर आज तक अभ्यारण्य नहीं बना है। सभा ने पुरजोर आग्रह किया है कि आवश्यक कागजी कार्यवाही करवाकर ग्राम रोटू जैसे ऐतिहासिक स्थल को अभ्यारण्य घोषित करवाया इन दिनों उक्त क्षेत्र में नगरपालिका नागौर का मृतक पशु ठेकेदार मृत पशु डालने लगा है। जिसके कारण मांसाहारी कुत्ते वन्यजीवों को मार रहे हैं। इस प्रकार उक्त बीहड़ में विचरण करने वाले वन्यजीवों का जीवन संकट में है। अखिल भारतीय जीवरक्षा बिश्रोई सभा आपसे पुरजोर मांग करती है कि उक्त 2500 बीघा जमीन को अभ्यारण्य घोषित किया जावे।अभ्यारण्य की मजबूत तारबन्दी करवाई जावे।


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