Tuesday, 01 December 2020

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बेणेश्वर धाम मेला 14 से प्रारंभ

आदिवासियों का महाकुंभ - मुख्य मेला 18 फरवरी को

डूंगरपुर, उत्तर भारत के आदिवासियों का महाकुम्भ कहा जाने वाला परम्परागत  बेणेश्वर महामेला माघ शुक्ल एकादशी, 14 फरवरी को शुरू होगा। यह मेला बांसवाडा और डूंगरपुर जिलों की सीमा पर माही एवं सोमजाखम नदियों के पवित्र जल संगम तीर्थ पर डूंगरपुर से 65 किलोमीटर दूर बेणेश्वर धाम पर आयोजित होगा। 

बेणेश्वर धाम पर स्थित राधाकृष्ण मंदिर  पर सोमवार को ध्वजारोहण से आरंभ होने वाले इस महाकुंभ के तहत मुख्य मेला माघ पूर्णिमा के दिन 18 फरवरी को भरेगा, जिसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु हिस्सा लेंगे और वागड़ अंचल के मेलार्थियों सहित पांच लाख से ज्यादा मेलार्थी एकत्रित होंगे।  मेलार्थी बेणेश्वर के पवित्र जल संगम तीर्थ में पवित्र डुबकी लगाने के अलावा अपने मृत परिजनों की अस्थियों का विसर्जन करते हैं और पितरों की स्मृति  में तर्पण आदि विधान पूरे करते हैं। ये मेलार्थी देव-दर्शनादि के उपरान्त मेला बाजारों से खरीदारी, लोकानुरंजन संसाधनों से मनोरंजन और मेला गतिविधियों में उल्लास के साथ हिस्सा लेते हैं।
आसपुर पंचायत समिति के माध्यम से आयोजित होने वाले इस मेले में मेलाबाजारों के लिए दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया जारी है और मेले के लिए दूरदराज से दुकानदारों का आगमन प्रारंभ हो गया है। मेले में  विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनियां  लगाई जाएंगी वहीं  टीएडी विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की खेलकूद प्रतियेागिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यटन विभाग द्वारा मेलार्थियों के अनुरंजनार्थ सांस्कृतिक संध्याओं के आयोजन तथा आतिशबाजी की व्यवस्था भी की जा रही है।  

भजन संध्याओं का रहेगा आकर्षणः
बेणेश्वर मेले में जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के तत्वावधान में तीन सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाएगा। धाम परिसर में बने मुक्ताकाशी रंगमंच पर 16 से 18 फरवरी तक आयोजित होने वाली सांस्कृतिक संध्याओं में देश-प्रदेश के ख्यातनाम भजन गायकों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केन्द्र रहेंगी। जिला पर्यटन अधिकारी अनिल तलवाड़िया ने बताया कि 16 फरवरी को राजस्थान व गुजरात के कलाकारों द्वारा चकरी, तेरहताली, केरवानो वेश, डांग नृत्य, भपंग वादन, ब्रज की होली व मयूर नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी वहीं स्थानीय साद कलाकारों द्वारा संत मावजी के रास  नृत्य और स्थानीय वागड़ी कलाकारों की मिश्रित प्रस्तुतियां जनाकर्षण का केन्द्र रहेंगी। इसके साथ ही अजमेर के पण्डित आनंद वैद्य की भजन संध्या भी भक्तिरस की स्वर लहरियां बिखेरेगी। इसी प्रकार 17 फरवरी को अजमेर की चित्र प्रकाश व सुधीर  के साथ ही उज्जैन के शर्मा बंधुओं की भजन संध्या मेलार्थियों को भाव विभोर करेगी जबकि स्थानीय कलाकारों द्वारा भी वागड़ी संस्कृति के प्रमुख लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके अलावा 18 फरवरी को बाल गायक मास्टर राणा की भजन संध्या के अलावा सिद्धी धमाल, लंगा मांगणियार, कालबेलिया नृत्यों की प्रस्तुतियों के मध्य स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों का आकर्षण रहेगा। 

प्रशासन तैयारः
मेला प्रभारी हेमसिंह चौहान ने बताया कि मेले में सुरक्षा की दृष्टि से पुलों पर रेलिंग लगाई गई है वहीं पूरे मेला परिसर को विभिन्न भागों में विभक्त कर मेलार्थियों की सुविधार्थ व मेले की व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न कार्मिकों को नियुक्त करते हुए पाबन्द किया गया है। मेला बाजार में आवागमन के रास्तों को अपेक्षाकृत चौड़ा रखा गया है ताकि मेलार्थियों को असुविधाओं का सामना नहीं करना पड़े। इसके अलावा मेले में साफ-सफाई, पेयजल, विद्युत आदि की व्यवस्थाओं के लिए पृथक्-पृथक् प्रभारी नियुक्त करते हुए दिशा निर्देश प्रदान किए गए हैं।  गत दिनों डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिले के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त बैठक उपरान्त विभिन्न विभागीय अधिकारियों ने मेलास्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ व्यवस्थाओं को सुचारू करने का कार्य प्रारंभ कर दिया है । दूर दराज से व्यापारियों का मेलास्थल पर आने का क्रम जारी हो गया है। इसी प्रकार विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जाने वाली संदेशपरक  प्रदर्शनियॉं स्थापित करने  के लिए भी विभागीय कार्मिकों द्वारा कार्य प्रारंभ कर दिया है। 

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