Thursday, 23 November 2017
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शेरसिंह और प्रशांत  ने जीति प्रतियोगिता

दसवीं रंगीला स्मृति ओपन शतरंज प्रतियोगिता का हुआ समापन

शेरसिंह और प्रशांत  ने जीति प्रतियोगिता

बीकानेर,  खेल लेखक और समीक्षक स्वर्गीय झंवर लाल व्यास ‘रंगीला’ स्मृति दसवीं ओपन शतरंज प्रतियोगिता का रविवार को समापन हुआ। 
नालंदा सीनियर सैकण्डरी स्कूल में आयोजित पुरस्कार वितरण तथा समापन समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. बी. आर. छीपा ने कहा कि खिलाड़ी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा के साथ खेलें। जीवन में सफलता के लिए शतरंज की भांति एकाग्रता और अनुशासन की महत्ती आवश्यकता होती है। उन्होंने अनवरत जीतने के प्रयास करने की सीख दी तथा कहा कि रंगीला ने खेल लेखन और समीक्षा को नए आयाम दिए। समाज ऐसे लोगों का ऋणी रहेगा। हमें उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से सीख लेनी चाहिए।
 अध्यक्षता करते हुए माध्यमिक शिक्षा के सेवानिवृत संयुक्त निदेशक विजय शंकर आचार्य ने कहा कि माता, पिता और गुरू का कोई विकल्प नहीं होता। ये निस्वार्थ भाव से अपने पुत्र अथवा शिष्य का जीवन संवारने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि लगन, मेहनत, समर्पण और नियमितता सफलता के साधन हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से छोटे-छोटे खिलाडि़यों को अवसर मिलेंगे तथा वे बड़े होकर देश और दुनिया में बीकानेर का नाम रोशन करेंगे।
 विशिष्ट अतिथि ‘मैनेंजमेंट गुरू’ डाॅ. गौरव बिस्सा ने कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा का नहीं बल्कि अनुस्पर्धा का है। उन्होंने कहा कि अभ्यास जीवन को बेहतर बनाता है तथा जीवटता सफलता का मर्म है। उन्होंने सफलता प्राप्त कर चुके विभिन्न लोगों के जीवन से सीख लेने का आह्वान किया तथा कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सार्थकता की ओर ले जाए, जिससे उनका जीवन समाज और देश के काम आ सके। 
इससे पहले अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन तथा रंगीला के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत की। प्रतियोगिता संयोजक एडवोकेट जुगल किशोर व्यास ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्रतियोगिता की रूपरेखा के बारे में बताया। खेल लेखक मनीष कुमार जोशी ने रंगीला के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। मधुसूदन व्यास ने आभार जताया। 

शेरसिंह और प्रशांत पुरोहित रहे विजेता
इससे पहले अतिथियों ने विभिन्न वर्गों में आयोजित शतरंज प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। सीनियर वर्ग के सात चक्रों में शेरसिंह चैहान ने 6.5 अंक हासिल कर खिताब जीता। वहीं छह अंकों के साथ कश्यप तिवाड़ी दूसरे अैर प्रद्युम्न पुरोहित तीसरे स्थान पर रहे। वहीं जूनियर वर्ग के नौ चक्रों में 8.5 अंक प्राप्त कर प्रशांत पुरोहित विजेता बने। दूसरे स्थान पर आदित्य पुरोहित (7.5 अंक) रहे तथा सात अंकों के साथ तुषार वर्मा ने तीसरे स्थान प्राप्त किया।  

सबसे छोटे तथा बुजुर्ग शातिर हुए पुरस्कृत
कार्यक्रम के दौरान सात वर्षीय सबसे छोटे शातिर रूचिर आचार्य तथा सर्वश्रेष्ठ इम्प्रूव्ड शातिर आठ वर्षीय लोकेश उपाध्याय, भरतपुर के अस्सी वर्षीय गोविंद सारस्वत और पुष्कर के 78 वर्षीय ज्योति प्रकाश शर्मा, बालिका वर्ग में दीपांशी गुप्ता, स्नेहा व्यास और शारदा आचार्य को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक डी.पी. छींपा, रामकिसन चैधरी और रामकुमार तथा आयोजन सहयोग के लिए नालंदा सीनियर सैकण्डरी स्कूल का अभिनंदन किया गया। 

इस अवसर पर रंगीला फाउण्डेशन के अध्यक्ष एडवोकेट बसंत आचार्य, दुर्गाशंकर आचार्य, पूर्व मिस्टर डेजर्ट राजेन्द्र व्यास, अनिरूद्ध आचार्य, किसन व्यास, मोहित व्यास, आदर्श विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य धनश्याम व्यास, सेवर्स स्क्वाॅयर के विजय बाफना, नितेश मारू, कपिल बहड़, श्रीराम बिस्सा, भैंरू रतन व्यास, पवन व्यास, श्रीनारायण पुरोहित, अमित पंवार, रूचिका व्यास सहित प्रतिभागी खिलाड़ी, अभिभावक, फाउंडेशन पदाधिकारी एवं आमजन मौजूद थे।  

डाॅ. बी. आर. छीपा   नालंदा स्कूल   शतरंज