Sunday, 23 July 2017

क्या आप आओगे आगे!


नगर विकास न्यास के चैयरमेन मकसूद अहमद द्वारा आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेस मे पत्रकारों द्वारा  बारम्बार जनता के काम नही होने और दलालों के माध्यम से ही काम होने सम्बन्धी प्रश्न पूछे । चैयरमेन अहमद ने लगभग सभी सवालों का ही एक ही उत्तर दिया कि ऐसा कोई भी प्रकरण मेरे सामने अभी तक आया ही नही है जिसमे जनता का काम नही हुआ हो और जो हुए है उसमे दलाली मेरे या मेरे विभाग के कर्मचारी द्वारा ली जा रही हो। अगर ऐसा तो मै चैलेंज करता हूं कि मै उस पर कार्यवाही करूंगा और मेरे पर लगाये कोई आरोप सिद्ध कर दे तो मै तुरंत इस्तीफा देने के लिए तैयार हुं और यहां तक की राजनीति भी छोड दूंगा।  मेरा परिवार पिछली चार पीढयों से ठेकेदारी करता आ रहा है लेकिन यूआइटी चैयरमेन के पद पर २२ माह के कार्यकाल मे मेरे या मेरे खून के रिश्ते मे किसी ने भी यूआईटी मे एक भी टेंडर नही भरा है और एक रूपये का भी काम हमने यूआईटी का नही लिया है।
लेकिन सवाल फिर घूम घूम कर वही आ रहा था कि जनता जो इतना त्रस्त नजर आ रही है और आम ओ खास के मुंह पे एक ही बात है कि यूआईटी मे दलाली के बगैर काम नही हो रहा है तो उन्होने कहा कि लोग ही जिम्मेवार है जो छुटभईयें नेताओं और वकीलों का दलाली देते है।
अब चैयरमेन मकसूद ने एक आम जनता और जनता के रहनुमाओं, विपक्ष के सामने एक चुनौती रख दी है कि केवल आरोप मत लगाओं और साबित करके दिखाओं।
तो है किसी के पास चेयरमेन महोदय का प्रतिउत्तर, क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने दलाली दी है और साबित कर सके की यूआईटी मे दलाली से ही काम होता है? या फिर मान लिया जाये कि मकसूद अहमद के दावे शत प्रतिशत सही है और आम जन बिन दलाली के समय पर अपना काम पूरा करवा पा रहा है।
मीडिया ऐसे मुद्दों की परते उतारने का काम करती रही है पर फिर भी उस व्यक्ति को निश्चित रूप से आगे आना ही होगा जिसने दलाली की पीडा भोगी है या भोग रहा है ताकि भ्रष्टाचार का कीडा स्वस्थ समाज की व्यवस्था दीमक की तरह उसे चट न कर पाये।