Tuesday, 28 September 2021

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एक सफल व सार्थक आयोजन: अंतर्राष्ट्रीय बाल आनन्द महोत्सव


22 नवम्बर से 28 नवम्बर तक बीकानेर के धरणीधर स्पोट्स काॅम्पलेक्स में राष्ट्रीय युवा योजना व आंतर भारती ट्रस्ट इंदौर के संयुक्त तत्वाधन में अंतर्राष्ट्रीय बाल आनन्द महोत्सव का आयोजन किया गया। यह आयोजन बीकानेर के लिए एक शानदार व अपने आप में पहला आयोजन था। बीकानेर अपनी विविध संस्कृति व भाईचारे तथा साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए पूरे भारत में विशिष्ट पहचान रखता है तो इस लिहाज से बीकानेर नगर की संस्कृति व स्वभाव के अनुरूप यह आयोजन बीकानेर के लिए विशेष महत्व रखता है। इस आयोजन में उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, केरला, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, बंगाल सहित भारत भर के करीब 16 राज्यों व एक पड़ौसी देश नेपाल के सैकड़ों बच्चों ने हिस्सा लिया। इस आायेजन के मूल व्यक्तित्व राष्ट्रीय युवा योजना के निदेशक व प्रखर गांधीवादी चिंतक विचारक डाॅ एस एन सुब्बाराव थे। डा एस एन सुब्बाराव की सेाच के अनुसार ये सैंकड़ों बच्चे बीकानेर केे बच्चों के घरों में अतिथि की तरह रहे और बीकानेर के बच्चों ने इनकी मेजबानी की। इस तरह संस्कृतियों के आदान प्रदान का यह एक महान् आयोजन था जहां पर बाल मन को भारत की विभिन्न संस्कृतियों व भाषाओं को जानने का एक स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ। बीकानेर के बच्चों ने नेपाली, कोंकणी, मराठी, मैथेली, असमिया, बंगाली भाषाओं की जानकारी प्राप्त की वहीं बाहर से आए बच्चे मारवाड़ी से परिचित हुए। 
आयोजन के पहले दिन विश्व शांति मार्च स्थानीय रतन बिहारी पार्क से पुष्करणा स्टेडियम तक निकाला गया। 84 वर्षीय डा एस एन सुब्बाराव के नेतृत्व में हजारों बच्चों ने इस शांति मार्च में हिस्सा लिया और जोड़े जोडो भारत जोड़ो के नारों से भारत की एकता की आवाज को बुलंद किया। इस शांति मार्च में बच्चे नारे लगा रहे थे कि बीकानेर हो या गुवाहटी, अपना देश अपनी माटी,  कश्मीर हो या कन्याकुमारी एक है भारत माता हमारी, हम बच्चों की कामना सद्भावना सद्भावना। इस तरह से नारों से बाल मन में देश के प्रति एकता की भावना व पूरे देश को एक नजर से देखने की भावना पैदा होती है और यह बात उनके मन में उतारने का प्रयास किया जाता है कि हम सबसे पहले भारतीय है न कि कोई बिहारी राजस्थानी मराठी या गुजराती। सद्भावना का ये संदेश देने के लिए जब ये बच्चे बीकानेर की सड़कों पर उतरें तो अपनी तासीर के अनुसार बीकानेर की हर कौम व हर वर्ग के लोगों ने डाॅ एस एन सुब्बाराम व इन हजारों बच्चों का मुक्त कंठ से व खुले मन से स्वागत किया। इन बच्चों को जगह जगह पर टाॅफिया, बिस्किट, चाॅकलेट, पानी, नींबू पानी व पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया और एक बार तो ऐसा लगा जैसे पूरे बीकानेर में इन बच्चों के सामने फूलों की सड़क बना दी गई है। इस रैली का स्वागत करने बीकानेर के राजनेता, समाजसेवी, उद्योगपति, व्यवसायी, विद्यर्थी, युवा, नौजवान, स्वयंसेवी संस्थाएॅं सब आगे आए। 
इस आयोजन में प्रतिदिन सुबह भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का ध्वज वंदन किया जाता और राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत के माध्यम से बच्चो में राष्ट्रीयता की भावना का संचार किया जाता। सभी प्रांतों से आए बच्चे जब एक ही प्रांगण में खड़ंे होकर जब तिरंगे को सलामी देते तो ऐसा लगता था मानो पूरा भारत अपने राष्ट्र ध्वज के सामने नमन कर रहा हो। इस दौरान भारत माता की जय व नेपाल माता की जय के नारे लगाए जाते और भारत नेपाल मैत्री जिंदाबाद का उद्घोष किया जाता। इस तरह अपने पड़ौसी देश के साथ मैत्री रखने का संदेश बच्चों तक पहुॅंचाया जाता। 
इस पूरे आयोजन के दौरान देश के विभिन्न प्रांतों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बच्चों को भारत दर्शन हुआ। बच्चे विविधता से भरे इस देश की संस्कृति से रूबरू हुए और जाना की अपना देश कितना विशाल है और इस देश में कितनी विविधता है और सीखा कि इन विविधताओं के साथ हमें भारत को एक रखना है। जब डाॅ एस एन सुब्बाराव जिनको सब प्यार से भाईजी कहते हैं, अपने स्वर में भारत माता की संतान गीत प्रस्तुत करते और साथ साथ अलग अलग भाषा प्रांतों के बच्चों द्वारा इस गीत पर प्रस्तुति दी जाती तो लगता कि 18 भाषाओं का यह देश एक सूत्र में पिरोया है और भाईजी बच्चों को इस दौरान सीखाते कि भाषा चाहे कुछ भी हो हमें एक माला तरह सब मोतियों को सजा कर रखना है और भारत को जोड़े रखने का संकल्प लेना है। सूदूर प्रांतों से आए बच्चे इस देश की विविधता से परिचित हुए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को देश भक्ति व राष्ट्रीय एकता के गीतों को सीखाया ही जाता साथ ही साथ बच्चों मे सकारात्मक ऊर्जा का विकास हो इसके लिए विभिन्न हाॅबी क्लासेज का भी आयोजन किया जाता। बच्चो ने इस दौरान मिट्टी से, कागज से, पुरानी चीजों से, व घरों में फालतू पड़े सामानों से कई प्रकार की वस्तुओं को बनाना सीखा। बच्चों को इस आयोजन में कविता, चित्रकला, पेंटिंग, कढ़ाई, बुनाई, विचित्र वेशभूषा आदि कईं प्रकार की जानकारी दी गई ताकि बच्चों में रचनात्मकता का विकास हो और बच्चा अपने अंदर छिपी प्रतिभा को स्वयं पहचानकर बाहर लाए। 
अभिभावकों के बिना एक सप्ताह तक अपने घर से दूर रह कर बच्चों ने स्वावलम्बन की शिक्षा ली। बीकानेर के लोगों ने बच्चों को यहां की शादियो में शरीक करवाया, यहां के पर्यटक व दर्शनीय स्थलों पर घुमाया और यहां के व्यंजनों के स्वाद को चखाया और अंतिम दिन जाते जाते बच्चों को आकर्षक उपहार भी दिए गए। रेलवे स्टेशन पर जब बच्चे वापस अपने घरों की ओर रवाना हो रहे थे तो उनकी आॅंखों में आंसू थे। मैं आपको यहां यह बताना चाहूॅंगा कि बच्चों के पहले दिन भी आंखों में आंसू थे क्योंकि वे एक दूसरे को समझ नहीं पा रहे थे और आखिरी दिन भी आंसू थे क्योंकि वे एक दूसरे से जुदा हो रहे थे । जब मैंने इस विषय पर भाईजी से बात करी तो उन्होंने कहा कि पहले दिन इसलिए रो रहे थे कि देश को जानते नहीं थे और अंतिम दिन इसलिए रो रहे हैं कि अपने भाईयों से बिछुड़ना नहीं चाहते। 
इस आयोजन को सफल करने के लिए बीकानेर के युवाओं की टीम कमल कल्ला, मनोज व्यास, के नेतृत्व में लगी हुई थी और अपने इस प्रयास में वे सफल भी रहे ऐसा मै कह सकता हूॅं। बीकानेर के लिए यह अनूठा आयोजन अपने आप में अनोखा भी था। यहां पर मै डाॅ एस एन सुब्बाराव के बारे में कुछ जरूर कहना चाहूॅंगा कि एक 84 साल का युवा जिसमें जबरदस्त ऊर्जा है जो अपने सारे दैनिक कार्य स्वयं अपने हाथों से करता है। सुबह जल्दी उठता है और समय पर अपने दिनभर के सारे कार्य सम्पादित करता है। मैने भाईजी के व्यक्तित्व मे एक चमक एक उत्साह और लगत देखी है जिसके जीवन का एक ही मकसद है कि हिमालय से लेकर सूदूर दक्षिण समुद्र पर्यंत भारत एक है और इस देश में शांति प्रगति व विकास बंदूक के बल पर नहीं प्यार से ही हासिल किया जा सकता है। युवा योजना व आंतर भारती के कार्यक्रमों के माध्यम से भाईजी ने सारा जीवन अपने इस उद्देश्य को पूरा करने में लगा रखा है। बिनाबा भावे के बाद शायद यह पहला व्यक्तित्व है जिसने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों को न सिर्फ अपना रखा है बल्कि उन आदर्शों पर जीवन यापन कर रहा हैं। भाईजी को सादर नमन। और उनके इस प्रयास में बीकानेर के कार्यक्रम को शामिल होकर मैं अपने आप को धन्य मानता हूॅं


श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’
पुष्करणा स्टेडियम के पास
नत्थूसर गेट के बाहर
बीकानेर {राजस्थान}
मो. 9950050079