Monday, 14 June 2021

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पांच विषयों में स्नातकोत्तर सुरेन्द्र जगा रहे है शिक्षा की अलख

शिक्षा के सोपान चढ सेवा को अपनाया, सुरेन्द्र ने वर्ष १९९४ में लेखा शास्त्रा, १९९९ में अर्थशास्त्रा, २००१ में इतिहास, २००३ में राजनैतिक विज्ञान और वर्ष २००५ में समाजशास्त्रा विषय में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की है

पांच विषयों में स्नातकोत्तर सुरेन्द्र जगा रहे  है शिक्षा की अलख

Surendra done graducation in Five subjectsडूंगरपुर १६ मई/ मन में जज्बा हो तो सेवा करने के उदात्त लक्ष्य को बिना किसी स्वयंसेवी  संगठन से जुडे राजकीय सेवा में कर्त्तव्य  निर्वहन के साथ भी हासिल किया जा सकता है। राजकीय कर्त्तव्यों के निर्वहन, शैक्षिक योग्यताओं में लगातार ईजाफा करने की सोच के साथ गरीब और पिछडे वर्ग के विद्यार्थियों को  प्रोत्साहित करने का जज्बा समेटे एक ऐसे ही शख्स है सुरेन्द्र कुमार भट्ट।
विद्यालय की कोई छोटी-मोटी आवश्यकता हो चाहे विद्यार्थियों की, उनके मन में हमेशा सहयोग की भावना रहती है। विद्यालय में अध्ययनरत निर्धन विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को जानकर पूर्ति करना तो उनके लिए परम् संतुष्टी का कार्य होता है। अब तक कई निर्धन व निराश्रित विद्यार्थियों को अपने खुद के खर्चें से अध्ययन सामग्री खरीद कर सौंप चुके  घोटाद निवासी शारीरिक  शिक्षक  सुरेन्द्र राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सरोदा में कार्यरत है। सिर्फ सेवा कार्य ही नहीं एक सफल विद्यार्थी की भांति अनवरत अध्ययन करते हुए उन्होंने  अब तक पांच विषयों में स्नातकोत्तर  उपाधि भी हासिल कर अन्य शिक्षकों के लिए आदर्श बने हुए हैं। 
सुरेन्द्र ने वर्ष १९९४ में लेखा शास्त्रा, १९९९ में अर्थशास्त्रा, २००१ में इतिहास, २००३ में राजनैतिक  विज्ञान और वर्ष २००५ में समाजशास्त्रा विषय में स्नातकोत्तर उपाधि हासिल  की है जिसके लिए उन्हें सहस्त्रा औदिच्य समाज दस गांव संगठन द्वारा बेणेश्वरधाम के पीठाधीश्वर महन्त अच्युतानंद महाराज द्वारा  सम्मानित भी किया जा  चुका है।
शैक्षिक  विकास के  सौपानों पर चढने वाले सुरेन्द्र में स्वयं शिक्षार्जन की आतुरता है तो अन्यजनों को शैक्षिक विकास के लिए  सहयोग करने की प्रवृत्ति भी। अध्ययन, सेवा और समर्पण  की इस त्रिावेणी से सिक्त हो चुके सुरेन्द्र कहते है कि ऐसा  करने से उन्हें आत्मिक आनन्द की अनुभूति होती है। उनका लक्ष्य है कि छोटी  मोटी आवश्यकताओं के अभाव में किसी विद्यार्थी का अध्ययन बाधित न हो और इसके लिए वे सतत प्रयासरत है। आदिवासी अंचल में शिक्षार्जन के साथ  सेवा भावना की अलख जगाते सुरेन्द्र  वर्तमान शैक्षिक समाज के लिए अनुकरणीय आदर्श हैं। 

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