Monday, 20 September 2021

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भंवरी के भंवर में उळजियों राजस्थान

ख्याल गीतों के तरकश मे नये तीर तैयार

बीकानेर, मरू शहर बीकानेर मे होलास्टक के दिनों में मंचित होने वाली लोक नाट्य रम्मतों में स्वांग मेहरी की रम्मत का अपना ही एक अलग स्थान है। परम्परागत नौटंकी रम्मत स्वांग मेहरी रम्मत के प्रमुख गीत “ख्याल” के तरकश मे इस बार भ्रष्टाचार, घोटाले और मंहगाई के साथ साथ राजस्थान के बहुचर्चित प्रकरण भंवरी देवी व अन्ना के आंदोलन पर केन्द्र व राज्य सरकार की विवशतओं ओर  राजनीति पर करारे व्यंग्य होंगें। होलाष्टक के आठ दिनों में शहर के विभिन्न स्थानों पर मंचित होने वाली रम्मतों मे बारह गुवाड चौक, कीकाणी व्यासों का चौक तथा भट्ठडों का चौक में स्वांग मेहरी रम्मतों का मंचन होता है। स्वांग मेहरी रम्मत मे लावळी, चौमासा तथा ख्याल ये तीन प्रमुख गीत, स्तुति की प्रस्तुति होती है। जंहा लावळी में भगवान की स्तुति वंदना होती है वहीं चौमासा मे धरती व आकाश तथा पुरूष व स्त्री के प्रेम का शब्द चित्रण होता है। जबकि ख्याल गीत मे शासन, प्रशासन, भ्रष्टाचार, मंहगाई, राजनीति, बेरोजगारी, दहेज प्रथा, कुरीतियों, कुप्रथाओं आदि पर खुले मंच के माध्यम से करारे व्यंग्य किये जाते है। इस बार मंचित होने वाली स्वांग मेहरी रम्मतों मे रम्मतों के उस्तादों ने घोटालों, मंहगाई, भ्रष्टाचार के साथ साथ भंवरी देवी प्रकरण तथा अन्ना के आन्दोलन को अपने अपने ख्यालों मे प्रमुखता से स्थान देने का मानस बनाया है। ख्याल गीतों की शब्द रचना तैयार हो चुकि है और बंसत पंचमी के दिन से वाद्य यंत्रों की पूजा के साथ इनका गायन अभ्यास भी चल रहा है। बीस फरवरी के बाद रम्मतों के अभ्यास परवान पर होगा। 

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