Sunday, 16 May 2021

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चिकित्सक विरोधी नितियां आम आदमी के लिए परेशानीयाँ - डॉ हर्ष

डॉक्टरों ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेन्ट एक्ट पर विरोध जताया

बीकानेर, आईएमए  बीकानेर की दोनों शाखाओं, क और अखिल राज.राज्य सेवारत चिकित्सक संघ द्वारा संयुक्त रूप से  अम्बेडकर सर्किल स्थित एक निजी आवास पर प्रेस कांफ्रेस आयोजित की गयी जिसमे सरकार द्वारा बनाए गए क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट , नेशनल काउन्सिल फॉर ह्यूमन रिसोर्स इन हेल्थ बिल का विरोध किया गया एव लगातार तीसरे वर्ष एमसीआई को भंग करने, बीआरएमएस  के मुद्दे पर ढुलमुल रवैया रखने पर सरकार की आलोचना की गयी  और देशभर भर के सरकारी चिकित्सकों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों  हेतु एक युनिफोर्म वेतन व्यवस्था लागू करने की माँग की गयी !
एनसीएचआरएच के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए डॉ एस एन हर्ष ने कहा यह सभी मेडिकल एवं पेरामेडिकल काउंसिल पर एक एसी कौंसिल बनाने की तैयारी है जो बिना किसी प्रोफेशनल संगठन की बात सुने सरकारी आदेशो की पालना सुनिश्चित करेगी एक और सरकार विकेन्द्रीकरण की बात कराती है वहीं स्वास्थय सेवाओं के प्रति दोहरा मापदंड अपनाते हुए सभी शक्तियों को केंद्रीकृत करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है इसमे ऐसे प्रावधान किये जा रहे है जो चिकित्सकों कतई मंजूर नहीं है जिनमे राज्य कौंसिल में रजिस्ट्रेशन केवल उसी राज्य में प्रेक्टिस हेतु मान्य होगा इससे एक तरह से राज्य कौंसिल का अस्तित्व ही समाप्त हों जाएगा| चिकित्सकों के चिकित्सा के अतिरिक्त अगर कोई और व्यवसाय किया जाता है तो डिग्री निलंबित होगी ऐसा करने से चिकित्सको के आजीविका के विभिन्न अवसरों पर रोक लगेगी यह चिकित्सकों  के मूलभूत अधिकारों का हनन है आईएमए इस कानून का विरोध करती है क्युकी यह यह मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य ढाँचे को बुरी तरह से प्रभावित करेगा और स्वास्थय का सरकारीकरण करने का प्रयास है 
डॉ राहुल हर्ष ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट स्वास्थ्य जगत के लिए खतरा बताते हुए बताया की देश में चिकित्सा विशेष रूप से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा का नब्बे प्रतिशत निजी हाथो में उनमे भी नब्बे प्रतिशत मरीज एकल डॉक्टर वाले क्लिनिक में दिखाते है इस क़ानून के लागू हों जाने से एकल डॉक्टर वाले क्लिनिक बंद हों जाने का खतरा पैदा हों गया है इससे कावल बहुराष्ट्रीय कंपनियों या बड़े व्यावसायिक घरानों द्वारा संचालित चिकित्सालय ही अपना अस्तित्व बचा पायेंगे और न केवल भारत की गरीब जनता पर अतिरिक्त महंगाई का भार पड़ेगा बल्कि उच्च स्तरीय बुद्धिमान विद्यार्थी मेडिकल शिक्षा से दूर हों जायेगा और देश में कुशल सुयोग्य चिकित्सकों का अभाव हों जाएगा . अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और ऑडिटिंग जैसे प्रावधानों से समर्पित चिकित्सा सेवाओं पर नौकरशाहों का नियंत्रण बढ़ेगा और चिकित्सकों के बिना विशेषज्ञता के काम करना बेहद मुश्किल हों जाएगा एक ही चिकित्सक द्वारा परिवार के सभी सदस्यों का इलाज कराने वाली फॅमिली फिजिसियन प्रथा समाप्त हों जाएगी और मरीज का इलाज बेहद महंगा हों जाएगा  
डॉ महेश शर्मा ने केंद्र सरकार के बी आर एच सी कौर्से का विरोध करते हुए कहा की ग्रामीण जनता हेतु यह दोयम दर्जे की डॉक्टर बनाने की योजना हमें कतई मंजूर नहीं है यह नीम हकीमी को बढ़ावा देने जैसा है जिन जिला चिकित्सालयों में यह कौर्स करवाने की योजना है वह प्रयाप्त संशाधन नहीं की डॉक्टर बनाने जैसा कौर्स करवा सके 
डॉ अबरार पंवार ने एम सी आई के बिना किसी कारण लगातार तीसरे साल भंग रखने का निर्णय लेने पर सरकार की आलोचना करते हुए सरकार से इसे तुरंत बहाल करने की माँग की डॉ सी एस मोदी ने कहा जब चिकित्सकों के लिए नियम राष्ट्रीय स्तर पर बनाए जा रहे है तो वेतन हर राज्य में अलग अलग क्यों ? केंद्र सरकार से माँग की पूरे देश में सरकारी चिकित्सको को एक जैसा वेतन मिले और देश भर के रेजिडेंट डॉक्टर को भी एक जैसा स्टाईफंड मिलाना चाहिए 
डॉ कालीचरण माथुर ने मौजूदा हालात पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा की साठ वर्षों की चिकित्सा सेवा बिना किसी थोपे गए क़ानून के सेवाभाव से करने के उपरांत अगर रजिस्ट्रेशन और न्यूनतम स्टेंडर्ड मेंटेन करने जैसी शर्ते लगाना बेहद पीड़ादायक होगा डॉ टी जी भटनागर ने एमपीएस की और से सोमवार को आयोजित बंद का पूर्ण समर्थन करते हुए अपने मेडिकल प्रेक्टिशनर सोसायटी बीकानेर के सभी चिकित्सकों को इमरजेंसी के अतिरिक्त सभी सेवाए बंद रखने का भरोसा दिलाया डॉ ललित मोहन सिंगारिया ने अरिस्दा के सभी सरकारी चिकित्सकों से आह्वान किया की वे सोमवार के दिन अपनी निजी प्रेक्टिस बंद रखे डॉ अज़ीज़ अहमद सुलेमानी ने चिकित्सकों को एकजुट होकर हालातों से मुकाबला करने की बात कही 

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