Monday, 14 June 2021

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बेदी को मिला व्यंग्य यात्रा सम्मान

डलहौजी में आयोजित एक कार्यक्रम

ऊना, ,02 सितंबर  (विजयेन्दर शर्मा ) ।   हिमाचल प्रदेश के व्यंग्यकार, कवि व कहानीकार गुरमीत बेदी को आज डलहौजी में आयोजित एक कार्यक्रम में देश के जाने-माने व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल और डॉ. प्रेम जनमेजय द्वारा व्यंग्य लेखन में उनके योगदान के लिए ‘व्यंग्य यात्रा’ सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध व्यंग्यकार व सहित्यकार बलराम, श्याम सखा श्याम, प्रताप सहगल, अतुल चतुर्वेदी, लालित्य ललित, डॉ. तरसेम गुजराल, रमेश सैनी, प्रत्युश गुलेरी, सुदर्शन वशिष्ट, सैली बलजीत, मनमोहन बावा, डॉ. रमेश तिवारी व अकबर रिज़वी भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से तीस से अधिक व्यंग्कारों व लेखकों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में डॉ. हरीश नवल ने बतौर मुयातिथि शिरकत की जबकि डॉ. प्रेम जनमेजय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर गुरमीत बेदी सहित कुछ व्यंग्यकारों ने व्यंग्यपाठ भी किया।
इस अवसर पर गुरमीत बदेी के व्यंग्य कौशल, भाषा व शिल्प की सराहना करते हुए डॉ. प्रेम जनमेजय ने कहा कि गुरमीत बेदी हिमाचल प्रदेश के उन गिने-चुने व्यंग्यकारों में शामिल हैं, जो व्यंग्य की मशाल जलाए हुए हैं। डॉ. हरीश नवल ने कहा कि गुरमीत के पास एक सधा हुआ व्यंग्य कौशल है और सामाजिक विषमताओं पर वार करने की उनकी अपनी शैली है। 
ऊना में जिला लोक संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत गुरमीत बेदी की तीन व्यंग्य पुस्तकें - ‘नाक का सवाल’, ‘इसलिए हम हंसते हैं’ और ‘खबरदार जो व्यंग्य लिखा’ शीर्षक से छपी हैं और उन्हें व्यंग्य के लिए कनाडा का ‘विरसा अवार्ड’ भी मिल चुका है। साहित्य की विभिन्न विधाओं में लिखने वाले गुरमीत बेदी की कविता, कहानी व शोध पर भी एक-एक पुस्तक प्रकाशित हुई है जबकि तीन उपन्यास - ‘नक्षत्रों के घेरे में’, ‘काले चश्मे वाला आदमी’ व ‘सरहद के उस पार’ शीर्षक से प्रकाशित हुए हैं। कविता संग्रह ‘मौसम का तकाजा’ के लिए गुरमीत बेदी को 1994 में हिमाचल साहित्य अकादमी अवार्ड भी मिल चुका है। 

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